उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राज्य का सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अंदरखाने अपनी बैठकों का दौर तेज कर दिया है, जिसमें उम्मीदवारों के चयन से लेकर मजबूत चुनावी रणनीति तक गहन मंथन किया जा रहा है। इसी सिलसिले में, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने आगामी रण के लिए अपनी कमर कस ली है। पार्टी ने शुरुआती चरण में लगभग 100 उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं, जबकि आगामी 15 नवंबर तक कुल 250 प्रत्याशियों के नाम फाइनल करने का एक बड़ा और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बसपा ने राजधानी लखनऊ में आयोजित बैठकों के जरिए सितंबर महीने तक ही अपने 100 उम्मीदवारों के चयन का टारगेट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। हालांकि, इन नामों की आधिकारिक सूची अभी सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की गई है। फिलहाल पार्टी स्तर पर आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यकर्ता सम्मेलनों के माध्यम से इन संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लगाने की प्रक्रिया चल रही है।
अंदरखाने के सूत्रों का दावा है कि पार्टी सुप्रीमो मायावती खुद व्यक्तिगत रूप से टिकट के प्रत्येक दावेदार से मिल रही हैं और उनके चुनावी समीकरणों को समझ रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया के बाद, पार्टी का अगला मुख्य लक्ष्य 15 नवंबर तक कुल 250 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम पूरी तरह तय कर लेना है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल आगामी 27 अक्टूबर तक लगातार अलग-अलग जिलों का दौरा कर पार्टी संगठन को सक्रिय रखने में जुटे रहेंगे। इसके साथ ही, पार्टी सुप्रीमो मायावती से औपचारिक अनुमति मिलने के बाद, पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद के भी जल्द ही चुनावी प्रचार मैदान में उतरने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
गौरतलब है कि पिछले दो विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी का चुनावी प्रदर्शन बेहद निराशाजनक और उम्मीदों के विपरीत रहा है। साल 2022 के पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को उत्तर प्रदेश में मात्र एक ही सीट पर सफलता मिल पाई थी। ऐसे में, आगामी 2027 का यह विधानसभा चुनाव बसपा के लिए केवल एक चुनावी लड़ाई नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक वजूद और अस्तित्व को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
