ट्विशा शर्मा हत्याकांड: पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे को 16 जून तक न्यायिक हिरासत, कोर्ट में उठाए जांच पर सवाल

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भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा हत्याकांड की जांच के बीच मंगलवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया। सीबीआई की विशेष अदालत ने मामले में सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो पिछले कई दिनों से दोनों से लगातार पूछताछ कर रही थी। प्रारंभिक जांच और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एजेंसी ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां सुनवाई के बाद न्यायिक हिरासत का फैसला सुनाया गया।

अदालत के आदेश के बाद दोनों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भोपाल केंद्रीय जेल ले जाया गया। जेल प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें सामान्य कैदियों से अलग रखने का निर्णय लिया है।

अधिकारियों के मुताबिक, जेल परिसर में विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति या सुरक्षा संबंधी खतरे से बचा जा सके। इस हाई-प्रोफाइल केस को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।

सुनवाई के दौरान उस समय स्थिति बेहद दिलचस्प हो गई जब सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने खुद अदालत में अपनी पैरवी करने का फैसला किया। उन्होंने अपने और बेटे समर्थ सिंह पर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए जांच एजेंसी के कई दावों पर सवाल उठाए।

उन्होंने अदालत को बताया कि उनके घर के सीसीटीवी फुटेज के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई है। गिरिबाला सिंह का कहना था कि जांच के दौरान कुछ तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे मामले की वास्तविक दिशा प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने अदालत में यह भी कहा कि हाल ही में किए गए क्राइम सीन रिकंस्ट्रक्शन के दौरान परिवार को अनावश्यक रूप से मीडिया के सामने लाया गया। उनका आरोप था कि जांच एजेंसी ने ऐसी व्यवस्था की, जिससे मीडिया उनकी गतिविधियों को आसानी से रिकॉर्ड कर सके और परिवार की सार्वजनिक छवि प्रभावित हो। हालांकि इस पूरे आरोप पर सीबीआई की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सुनवाई के दौरान एक और नया विवाद सामने आया, जब गिरिबाला सिंह ने दावा किया कि पिछली अदालती पेशी के दौरान पीड़ित पक्ष के एक वकील ने उनके बेटे समर्थ सिंह के साथ अनुचित व्यवहार किया था। इस आरोप के बाद अदालत परिसर का माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। वहीं संबंधित वकील ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि अदालत परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से सच्चाई साफ हो सकती है। इस आरोप-प्रत्यारोप ने पूरे मामले को और अधिक चर्चित बना दिया है।

हालांकि सीबीआई ने इस बार पुलिस रिमांड बढ़ाने की मांग नहीं की, लेकिन एजेंसी ने अदालत को स्पष्ट रूप से बताया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कई पहलुओं की पड़ताल जारी है। अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच के दौरान कोई नया सबूत सामने आता है या अतिरिक्त पूछताछ की आवश्यकता महसूस होती है तो दोबारा पुलिस हिरासत की मांग की जा सकती है। फिलहाल एजेंसी न्यायिक हिरासत के दौरान जुटाए गए बयानों, दस्तावेजों और अन्य तथ्यों का विस्तृत विश्लेषण कर रही है।

जांच का अगला चरण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब सीबीआई का मुख्य फोकस डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों पर रहेगा। पूछताछ में मिले बयानों का मिलान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड से किया जा रहा है। जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोन, हार्ड ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की फोरेंसिक जांच भी तेजी से चल रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल डेटा मामले से जुड़े कई अहम पहलुओं को स्पष्ट कर सकता है।

इसके अलावा इस पूरे मामले में एम्स नई दिल्ली से आने वाली दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि मेडिकल रिपोर्ट ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दे सकती है और जांच की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। यही वजह है कि इस रिपोर्ट को केस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

फिलहाल ट्विशा शर्मा हत्याकांड की जांच और कानूनी प्रक्रिया दोनों निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी हैं। आने वाले दिनों में फोरेंसिक विश्लेषण, डिजिटल सबूत और मेडिकल रिपोर्ट इस हाई-प्रोफाइल केस में नए खुलासों की वजह बन सकते हैं। जांच एजेंसियां मामले के हर पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके और सभी तथ्यों को कानूनी रूप से मजबूत किया जा सके।