आगरा: भारतीय जनता पार्टी की महानगर कार्यकारिणी की घोषणा के बाद उपजा आंतरिक असंतोष अभी थमा भी नहीं था कि एक वायरल वीडियो ने पार्टी की अनुशासन वाली छवि पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे इस वीडियो में नवनियुक्त महानगर मंत्री अनिल सारस्वत, राज्यसभा सांसद नवीन जैन के सामने जमीन पर लेटकर दंडवत प्रणाम करते नजर आ रहे हैं। इस दृश्य ने ताजनगरी की राजनीति में ‘चाटुकारिता बनाम संगठन संस्कृति’ की एक नई और तीखी बहस को जन्म दे दिया है।
असंतोष के बीच वायरल वीडियो ने बढ़ाई मुश्किलें
गौरतलब है कि महानगर कार्यकारिणी की नई सूची जारी होने के बाद से ही कई पुराने कार्यकर्ताओं और पद के दावेदारों के बीच नाराजगी की खबरें छन-छन कर बाहर आ रही थीं। ऐसे संवेदनशील समय में इस वीडियो का सामने आना केवल एक सामान्य सम्मान का प्रदर्शन नहीं माना जा रहा। राजनैतिक हलकों में इसे नियुक्तियों के पीछे के ‘शक्ति-संतुलन’ और बड़े नेताओं के प्रति सार्वजनिक निष्ठा प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है।
व्यक्ति पूजा या भारतीय संस्कार? बंटी राय
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सैलाब आ गया है। जहाँ एक वर्ग इसे भारतीय संस्कृति और बड़ों के प्रति सम्मान की परंपरा बताकर बचाव कर रहा है, वहीं दूसरा बड़ा वर्ग इसे राजनीति में पद पाने के लिए की जाने वाली ‘अति-चाटुकारिता’ का जीवंत उदाहरण करार दे रहा है। राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है कि कैडर आधारित पार्टी, जो हमेशा ‘व्यक्ति से बड़ा संगठन’ का नारा देती है, वहां इस तरह का सार्वजनिक समर्पण कार्यकर्ताओं के मनोबल पर विपरीत असर डाल सकता है।
विपक्ष के हाथ लगा बड़ा मुद्दा
इस वायरल वीडियो ने विपक्षी दलों को भाजपा पर हमला करने का एक ठोस अवसर दे दिया है। विपक्षी खेमा इसे भाजपा की आंतरिक कार्यप्रणाली और पद पाने की होड़ में नेताओं के इर्द-गिर्द बनते शक्ति-केंद्रों का प्रतीक बताकर निशाना साध रहा है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या अब संगठन में मेहनत और समर्पण से ज्यादा बड़े नेताओं की ‘नजदीकी’ मायने रखने लगी है?
संगठन के भीतर भी दबी जुबान में चर्चा
सूत्रों की मानें तो भाजपा संगठन के भीतर भी इस वीडियो को लेकर असहज स्थिति बनी हुई है। निष्ठावान कार्यकर्ता इस बात से चिंतित हैं कि इस तरह की तस्वीरें जनता के बीच क्या संदेश भेज रही हैं। फिलहाल, यह वीडियो नई कार्यकारिणी के कामकाज से ज्यादा पार्टी के भीतर ‘व्यक्ति पूजा’ के बढ़ते चलन को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब देखना यह है कि संगठन इस पर क्या रुख अपनाता है।

