समय पर आपातकालीन सर्जरी से बची मरीज की जान: गंभीर टेस्टिकुलर टॉर्शन में जीवनरक्षक हस्तक्षेप

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स्वायत्त राज्य मेडिकल कॉलेज, सुल्तानपुर:
सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग द्वारा सर्जिकल रोगी देखभाल एवं अकादमिक उत्कृष्टता की निरंतर प्रतिबद्धता
स्वायत्त राज्य मेडिकल कॉलेज, सुल्तानपुर के सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग द्वारा सर्जिकल रोगी देखभाल, आपातकालीन सेवाओं, अकादमिक शिक्षण एवं क्लिनिकल प्रशिक्षण में निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है। विभाग का विशेष ध्यान समय पर उपचार, टीमवर्क, मरीज की सुरक्षा एवं जीवनरक्षक आपातकालीन चिकित्सा पर रहता है।

हाल ही में एक 26 वर्षीय पुरुष मरीज को तीव्र अंडकोषीय दर्द एवं आपातकालीन स्थिति में अस्पताल लाया गया। तत्काल क्लिनिकल परीक्षण एवं कलर डॉप्लर अल्ट्रासोनोग्राफी में बाएं अंडकोष में रक्त प्रवाह न होने के साथ तीव्र बाएं टेस्टिकुलर टॉर्शन (अंडकोष का मरोड़) की संभावना सामने आई।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग द्वारा मरीज को तत्काल आपातकालीन सर्जिकल प्रबंधन के लिए लिया गया।

मरीज का उपचार डॉ. किरण रेबेलो, एसोसिएट प्रोफेसर, सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग, के निर्देशन में डॉ. आदित्य गंगवार, सीनियर रेजिडेंट के साथ किया गया। डॉ. जयदीप गौतम, जूनियर रेजिडेंट, भी उपस्थित रहे और मरीज के प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल रहे।

ऑपरेशन के दौरान स्थिति प्रारंभिक जांच से भी अधिक गंभीर पाई गई। बायां अंडकोष गंभीर रूप से संक्रमित, गैंग्रीनग्रस्त एवं अत्यधिक मवाद से भरा हुआ था। अंडकोष पूरी तरह गैर-जीवित (non-viable) हो चुका था और उसे बचाया नहीं जा सका। संक्रमण एवं नेक्रोसिस की गंभीरता को देखते हुए गैर-जीवित अंडकोष को हटाना आवश्यक था, ताकि संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके और मरीज को आगे होने वाली गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सके।

सर्जिकल निर्णय में अतिरिक्त विशेषज्ञ राय के लिए डॉ. आकाश श्रीवास्तव, असिस्टेंट प्रोफेसर, एवं डॉ. सुकैश के. एस., असिस्टेंट प्रोफेसर, से दूसरी राय भी ली गई।

एनेस्थीसिया टीम की ओर से डॉ. राजेश , असिस्टेंट प्रोफेसर, एनेस्थीसियोलॉजी विभाग, ने महत्वपूर्ण पेरीऑपरेटिव सहयोग प्रदान किया।

विभाग डॉ. अनुज जैन के निरंतर क्लिनिकल एवं अकादमिक मार्गदर्शन और सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त करता है, जो विभाग की कार्यप्रणाली को निरंतर मजबूत करते हैं।

यद्यपि गंभीर गैंग्रीन एवं संक्रमण के कारण अंडकोष को बचाया नहीं जा सका, लेकिन समय पर पहचान और आपातकालीन सर्जिकल हस्तक्षेप से मरीज की जान बचाने में सफलता मिली तथा गंभीर संक्रमण एवं सेप्सिस जैसी संभावित जीवन-घातक जटिलताओं को नियंत्रित किया जा सका।

टेस्टिकुलर टॉर्शन: एक ऐसी आपातकालीन स्थिति जिसके बारे में सभी को पता होना चाहिए

टेस्टिकुलर टॉर्शन एक सर्जिकल इमरजेंसी है। इसमें अंडकोष को रक्त पहुंचाने वाली स्पर्मेटिक कॉर्ड मुड़ जाती है, जिससे अंडकोष में रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है। समय पर उपचार न मिलने पर अंडकोष में स्थायी क्षति, नेक्रोसिस और गैंग्रीन विकसित हो सकता है।

प्रमुख चेतावनी संकेत

निम्न लक्षण होने पर तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लें:

एक अंडकोष में अचानक और तेज दर्द
अंडकोष या अंडकोश में अचानक सूजन
अंडकोष का सामान्य स्थिति से ऊपर उठ जाना या असामान्य स्थिति में होना
अंडकोष के दर्द के साथ जी मिचलाना या उल्टी
अचानक पेट के निचले हिस्से या ग्रोइन में दर्द

दर्द अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें। स्वयं दवा लेकर समय न गंवाएं और चिकित्सा परामर्श में देरी न करें।

शीघ्र पहचान एवं तत्काल सर्जिकल उपचार से प्रभावित अंडकोष को बचाने की संभावना सबसे अधिक होती है।
हर घंटा महत्वपूर्ण है।

यह केस एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि समय पर अस्पताल पहुंचना अंडकोष को बचाने और उसे खोने के बीच का अंतर हो सकता है।

टीमवर्क ने बनाया अंतर

इस आपातकालीन स्थिति में मरीज की सफल चिकित्सा सामान्य शल्य चिकित्सा, एनेस्थीसियोलॉजी एवं सहयोगी टीमों के समन्वित प्रयासों का परिणाम रही।
अंडकोष को बचाया नहीं जा सका—लेकिन मरीज की जान बचाई गई।

यह केस सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग की समय पर, निर्णायक एवं जीवनरक्षक आपातकालीन सर्जिकल सेवाएं प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही अकादमिक उत्कृष्टता एवं क्लिनिकल लर्निंग को निरंतर बढ़ावा देता है।

पूरी टीम को हार्दिक बधाई

इस चुनौतीपूर्ण आपातकालीन स्थिति के सफल प्रबंधन के लिए पूरी टीम को उनकी समयबद्ध कार्रवाई, समर्पण, मेहनत और उत्कृष्ट टीमवर्क के लिए हार्दिक बधाई।

विशेष आभार एवं बधाई — डॉ. प्रियंक वर्मा, प्राचार्य, स्वायत्त राज्य मेडिकल कॉलेज, सुल्तानपुर, उनके प्रोत्साहन, नेतृत्व एवं निरंतर सहयोग के लिए।

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