नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का दूसरा और निर्णायक चरण सोमवार से शुरू हो रहा है। इस सत्र के हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं, क्योंकि विपक्ष इस बार लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ ‘अविश्वास प्रस्ताव’ (No-Confidence Motion) लेकर आ रहा है। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और फिर इस प्रस्ताव पर वोटिंग होने की उम्मीद है।
प्रतीकात्मक लड़ाई या सियासी बिसात?
विपक्ष ने सत्र के पहले हिस्से में स्पीकर पर पक्षपात करने, विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का पर्याप्त समय न देने और सांसदों के निलंबन जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, 543 सदस्यों वाली लोकसभा में संख्या बल को देखते हुए इस प्रस्ताव के पारित होने की संभावना बेहद कम है, लेकिन इंडिया (INDIA) ब्लॉक इसे एक ‘पॉलिटिकल स्टेटमेंट’ के तौर पर देख रहा है।
विधानसभा चुनावों से पहले एकजुटता का प्रदर्शन
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह अविश्वास प्रस्ताव केवल प्रतीकात्मक है। इसका असली मकसद आगामी विधानसभा चुनावों (तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल) से पहले विपक्षी एकता को प्रदर्शित करना है। विपक्ष इस मंच का इस्तेमाल अमेरिकी टैरिफ विवाद और एपस्टीन फाइल्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए भी कर सकता है।
सरकार की रणनीति
दूसरी ओर, सत्ता पक्ष इस प्रस्ताव को विपक्ष की हताशा बता रहा है। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास सदन में स्पष्ट बहुमत है, जिससे ओम बिरला की कुर्सी को कोई खतरा नहीं दिख रहा है। सरकार की कोशिश बजट से जुड़े महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को निपटाने और विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब देने की होगी।

