सकलेशपुर (कर्नाटक)। बैंकिंग सिस्टम की बेरुखी और नियमों की सख्ती कभी-कभी आम आदमी को किस कदर विद्रोही बना देती है, इसकी एक बानगी कर्नाटक के हासन जिले में देखने को मिली। यहाँ एक किसान और केनरा बैंक के बीच महज 9 रुपये 34 पैसे को लेकर ऐसी ‘रार’ छिड़ी कि बैंक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए।
क्या है पूरा मामला?
किसान चोक्कन्ना गौड़ा ने बैंक से 50 हजार रुपये का कृषि ऋण लिया था। समय पर पूरा कर्ज चुकाने के बाद उन्हें लगा कि हिसाब बराबर हो गया। लेकिन कुछ महीनों बाद बैंक से एक मैसेज आया कि उनके खाते में अब भी 9.34 रुपये का बकाया है। बैंक ने सख्त लहजे में कहा कि जब तक यह मामूली रकम जमा नहीं होगी, उन्हें नया लोन नहीं मिल पाएगा।
66 पैसे की ‘कानूनी’ डिमांड
बैंक की इस सख्ती से आहत चोक्कन्ना गौड़ा हार मानने के बजाय पूरी तैयारी के साथ बैंक पहुँचे। उन्होंने काउंटर पर 10 रुपये का नोट रखा और बकाया चुकाने की रसीद माँगी। लेकिन ट्विस्ट तब आया जब उन्होंने बैंक कर्मचारियों से अपने 66 पैसे वापस माँग लिए। गौड़ा का तर्क सीधा और सटीक था “अगर बैंक 1 पैसे की वसूली के लिए मुझे फोन कर परेशान कर सकता है, तो ग्राहक होने के नाते मुझे भी अपने 66 पैसे वापस लेने का पूरा हक है।”
सम्मान और इंसाफ की लड़ाई
चोक्कन्ना गौड़ा पिछले 20 सालों से बैंक के ग्राहक हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यह लड़ाई पैसों की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और इंसाफ की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जहाँ करोड़ों रुपये डकारने वाले बड़े डिफॉल्टर खुलेआम घूम रहे हैं, वहीं सिस्टम एक छोटे किसान को चंद रुपयों के लिए अपमानित करता है।
सिस्टम के दोहरे मापदंड उजागर
यह घटना उस समय सामने आई है जब एक ओर किसान 66 पैसे के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर देश में करोड़ों के बैंक फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 152 करोड़ के घोटाले में छापेमारी की थी, जहाँ फर्जी खातों के जरिए बैंकों को चूना लगाया गया। चोक्कन्ना गौड़ा की यह ‘गांधीगिरी’ अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और बैंकिंग लोकपाल के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
ये खबर सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर लिखी गयी है हम किसी क्रम की पुष्टि नही करते है।

