आगरा। शहर के कोतवाली क्षेत्र में शुक्रवार की रात जो कुछ भी हुआ, वह सिर्फ एक पुलिस केस या ‘मर्डर मिस्ट्री’ नहीं है, बल्कि एक मां के जीते-जी मर जाने की कहानी है। पूनम नाम की उस मां के लिए वह रात कयामत बनकर आई, जिसने अपनी आंखों के सामने अपने कलेजे के एक टुकड़े को दूसरे का खून करते देखा। आज उस घर के आंगन में सन्नाटा है, जहां कभी दो भाइयों की हंसी गूंजती थी। एक बेटा अब कफन में लिपटा है, और दूसरा सलाखों के पीछे।
“मुझे धक्का देकर अलग कर दिया, मैं बचा नहीं पाई”
रोते-रोते बदहवास हो चुकी मां पूनम ने उस मंजर को बयां किया जिसे सोचकर ही रूह कांप जाए। उन्होंने बताया कि झगड़ा शुरू हुआ तो वह दोनों के बीच आईं, गिड़गिड़ाईं, लेकिन गुस्से में अंधे हो चुके छोटे बेटे आकाश ने अपनी मां को ही धक्का देकर अलग कर दिया। पूनम की आंखों के सामने छोटा बेटा आकाश अपने बड़े भाई गौरव पर लात-घूंसों से वार करता रहा।
निर्दयता की हद: “अभी सांस चल रही है, चाहो तो ले जाओ अस्पताल”
पूनम ने बताया कि गौरव को बुरी तरह लहूलुहान करने के बाद आकाश के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। उसने घर को लॉक कर दिया और चाबी अपने पास रख ली। नीचे आकर उसने अपनी मां से बेरुखी से कहा “अभी इसकी सांस चल रही है, चाहो तो ले जाओ अस्पताल।” यह शब्द उस मां के कान में आज भी हथौड़े की तरह बज रहे हैं।
सेहरा सजाने की तैयारी थी, पर नसीब में कफन निकला
मां पूनम के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वह बताती हैं कि गौरव (30) की शादी के लिए इन दिनों लड़कियां देखी जा रही थीं। वह घर ही नहीं, पूरे मोहल्ले का लाडला था। वह अक्सर अपनी मां से कहता था “मां, मैं ये खरीद लूंगा… वो खरीद लूंगा।” पूनम को क्या पता था कि जिस बेटे के सिर पर वह सेहरा सजाने का ख्वाब देख रही हैं, उसे अपने ही हाथों से मिट्टी देनी होगी।
दोहरी त्रासदी: छिन गई गोद की दोनों खुशियां
पूनम के पति की पहले ही मौत हो चुकी है। अब इस एक घटना ने उनकी पूरी दुनिया उजाड़ दी। बड़ा बेटा (गौरव) हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गया। छोटा बेटा (आकाश) भाई की हत्या के दाग और कानून के शिकंजे में कैद हो गया।
पैसे के विवाद ने रिश्तों की डोर को इस कदर झटके से तोड़ा कि आज उस घर में केवल एक बेबस मां की सिसकियां और पछतावा बचा है। यह घटना समाज के लिए एक कड़वा सबक है कि कैसे चंद रुपयों का लालच और बेकाबू गुस्सा हंसते-खेलते परिवारों को श्मशान बना देता है।

