आगरा: ताजनगरी के प्रतिष्ठित स्कूलों की फिजां इन दिनों खराब होती नजर आ रही है। लगता है ‘शिक्षा के मंदिर’ कहे जाने वाले ये संस्थान अब ‘अपराध के अखाड़े’ में तब्दील हो रहे हैं। मामला डीपीएस शास्त्रीपुरम (DPS Shastripuram) का है, जहाँ स्कूल प्रशासन की लचर व्यवस्था के चलते छात्रों के बीच आपराधिक प्रवृत्तियां तेजी से पैर पसार रही हैं। सोशल मीडिया और रील संस्कृति के प्रभाव में आकर छात्र अब पढ़ाई की जगह जुर्म के रास्ते को अपना रहे हैं।
यूट्यूबर के पुत्र पर हमला, अब तक कार्रवाई नहीं
बीते दिनों मशहूर यूट्यूबर पीयूष मल्होत्रा के पुत्र के साथ स्कूल के ही कुछ दबंग छात्रों ने बेरहमी से मारपीट की थी। इस हमले में छात्र के चार दांत टूट गए थे और वह गंभीर रूप से घायल हुआ था। हैरान करने वाली बात यह है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे दबंग छात्रों के हौसले और बुलंद हो गए हैं।
वरिष्ठ पत्रकार के पुत्र को जान से मारने की धमकी
अभी मल्होत्रा प्रकरण शांत भी नहीं हुआ था कि ताज प्रेस क्लब के सचिव और वरिष्ठ पत्रकार पीयूष शर्मा के पुत्र को इंस्टाग्राम पर जान से मारने की धमकी दी गई है। धमकी देने वाले छात्र ने इंस्टाग्राम पर यहाँ तक लिखा है कि “वह पूर्व में भी दो से तीन हत्याएं करवा चुका है और अब अगला नंबर तुम्हारा है।” इस खौफनाक धमकी के बाद से पीड़ित छात्र गहरे अवसाद (Depression) में चला गया है। परिवार डरा हुआ है और बच्चे की मानसिक स्थिति को लेकर चिंतित है।
स्कूल प्रशासन पर उठ रहे गंभीर सवाल
आगरा के सम्मानित और प्रतिष्ठित परिवार अब असमंजस में हैं कि क्या वे अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में भेजें जहाँ शिक्षा की जगह ‘क्राइम का पाठ’ पढ़ाया जा रहा हो। डीपीएस शास्त्रीपुरम जैसे नामी स्कूल की यह लचर सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की अनदेखी शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। अभिभावकों का सवाल है कि क्या स्कूल प्रशासन ऐसे क्रिमिनल प्रवृत्ति के छात्रों को संरक्षण दे रहा है या फिर उन पर नियंत्रण पाने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है।
मान्यता रद्द करने की मांग
सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों ने मांग की है कि आगरा के ऐसे सभी प्रतिष्ठित स्कूलों की जांच होनी चाहिए जहाँ छात्र अनुशासन की जगह अपराध को प्राथमिकता दे रहे हैं। मांग उठ रही है कि पुलिस और शिक्षा विभाग इन क्रिमिनल प्रवृत्ति के छात्रों पर सख्त कार्रवाई करें और बार-बार लापरवाही बरतने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जाए।

