आस्था की चौखट पर असुरक्षा: सामाजिक विश्वास और सांस्कृतिक चेतना पर सीधा आघात
भारत की सांस्कृतिक पहचान केवल उसके इतिहास, भाषाओं और परंपराओं से नहीं बनती, बल्कि उन आस्था-स्थलों से भी निर्मित होती है जिन्होंने सदियों से समाज को नैतिकता, सहअस्तित्व और सामुदायिक एकता का संदेश दिया है। मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं हैं; वे विश्वास, संस्कृति, लोकजीवन और सामाजिक सहभागिता के जीवंत केंद्र हैं। यहां लोग […]
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