जौहर की स्मृति और शब्दों की मर्यादा: इतिहास, नारी-अस्मिता और सार्वजनिक विमर्श में संवेदना की जरूरत

इतिहास केवल बीती हुई घटनाओं का संग्रह नहीं है। वह समाज की सामूहिक स्मृति, पीड़ा, संघर्ष, त्याग और अस्मिता का दस्तावेज भी है। इसलिए इतिहास के किसी संवेदनशील प्रसंग पर चर्चा करते समय केवल वर्तमान दृष्टि को आधार बनाना पर्याप्त नहीं होता। उसके पीछे छिपे सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय संदर्भों को समझना भी उतना ही […]

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हर किसी का अपना सावन: प्रकृति, संस्कृति और भावनाओं का अनूठा उत्सव

भारत मानसून के आगमन के साथ मौसम में बदलाव का स्वागत करता है, और इससे भी कहीं अधिक। यह एक ऐसे मौसम की शुरुआत है जो फलों की भरपूर फसल, ताजगी और नए जीवन को जन्म देता है, साथ ही मानव हृदयों में नई आशा और सदियों से समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करता है। […]

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खुशी के टिकट पर मातम का सफर: मेलों में झूलों की ‘फिटनेस’ महज औपचारिकता या सिस्टम का बड़ा खेल?

हरियाणा के सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में झूला टूटने की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारे यहाँ मनोरंजन भी जान जोखिम में डालकर ही किया जाता है। जिस मेले को संस्कृति, कला और पर्यटन का उत्सव कहा जाता है, वही मेला एक पल में चीखों, अफरातफरी और मातम में बदल गया। झूले […]

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