पद्मश्री की वेदना: ब्रज साहित्य व संस्कृति के प्रति कृतघ्नता की पराकाष्‍ठा

इतिहास, साहित्य तथा संस्कृति आदि विशिष्‍टताओं के कारण ब्रज की संस्कृति इतनी समृद्ध रही है कि वह भारतीय संस्कृति का पर्याय बन चुकी है। राधा-कृष्‍ण की जन्मभूमि, ब्रजभाषा जैसी माधुर्यमयी समृद्ध भाषा, वात्सल्य और भक्ति रस के महान कवि सूरदास, सन्त-संगीतज्ञ स्वामी हरिदास आदि के अप्रतिम योगदान से ब्रज का महत्त्वपूर्ण स्थान होने पर भी […]

Continue Reading

मथुरा: पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया का प्रयास लाया रंग, सूरदास ब्रजभाषा अकादमी की हुई स्थापना

मथुरा। उत्‍तरप्रदेश में उर्दू, सिन्धी तथा पंजाबी आदि भाषाओं की अकादमी स्थापित होने और तुलनात्मक रूप से अधिक समृ़द्ध होने पर भी ब्रजभाषा अकादमी स्थापित न होने के कारण ब्रजभाषा के साहित्यकार, कवि व कलाकारों में असन्तोष व्याप्त था। इसी को लेकर मथुरा में पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने सूरदास अकादमी की स्थापना की घोषणा […]

Continue Reading

ब्रज – रज उत्सव: ब्रज संस्कृति प्रदर्शन से अधिक दिल्ली में लगने वाले ‘व्यापार मेला’ जैसा

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् प्रारम्भिक काल में सरकार द्वारा आर्थिक उन्नयन, पानी, बिजली, सड़क निर्माण आदि की व्यवस्थाओं की प्राथमिकता दी गई और 60 – 70 के दशक में शासन स्तर पर संस्कृति विभाग के अन्तर्गत इस समय उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, राज्य ललित कला अकादमी, भारतेन्दु नाट्य अकादमी, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान तथा […]

Continue Reading

हरियाली तीज: प्राचीन परम्पराओं का धीरे-धीरे समाप्त होते जाना चिन्तनीय है

ब्रज लोक संस्कृति मर्मज्ञ पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने हरियाली तीज पर कई गाँवों का सर्वेक्षण करके पाया कि अब से एक वर्ष तक पूर्व तक गाँवों में हरियाली तीज का हर्षोल्‍लास छाया रहता था किन्तु अब न तो सुनीं गईं ये मनुहार – हरियल – हरियल अम्मा मेरी मैं करूँ जी,ए जी कोई आईं […]

Continue Reading