आगरा: कर प्रणाली की पेचीदगियों को समझने और भविष्य के वित्तीय नेतृत्व के लिए छात्रों को तैयार करने के उद्देश्य से आगरा कॉलेज के वाणिज्य संकाय द्वारा एक दिवसीय ‘जीएसटी जागरूकता कार्यक्रम’ का भव्य आयोजन किया गया। बी.कॉम और एम.कॉम के छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित इस सत्र में वस्तु एवं सेवा कर (GST) की बारीकियों को किताबी ज्ञान से हटकर व्यावहारिक धरातल पर समझाया गया।
प्राचार्य की अध्यक्षता में बौद्धिक विमर्श
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर सी.के. गौतम ने की। उप-प्राचार्य प्रोफेसर पीवी झा और चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर वीके सिंह के कुशल निर्देशन में आयोजित इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य छात्रों को बदलते आर्थिक परिवेश के अनुरूप ढालना था। वक्ताओं ने जोर दिया कि आज के समय में जीएसटी की समझ केवल सीए या वकीलों के लिए नहीं, बल्कि हर वाणिज्य छात्र के लिए अनिवार्य है।
रजिस्ट्रेशन से लेकर दंड तक: विशेषज्ञ ने सुलझाईं गुत्थियाँ
मुख्य वक्ता एवं जीएसटी विशेषज्ञ संजीव भारद्वाज ने छात्रों को कर प्रणाली के चक्रव्यूह से बाहर निकलने के आसान तरीके बताए। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला:
पंजीकरण और रिटर्न: जीएसटी पंजीकरण की पात्रता और समय पर रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC): व्यवसाय के लिए आईटीसी के लाभ और इसकी गणना का तरीका।
पारदर्शिता: जीएसटी लागू होने के बाद भारतीय कर ढांचे में आई सरलता और जवाबदेही।
अनुपालन और दंड: नियमों के उल्लंघन पर होने वाली विधिक कार्यवाही और आर्थिक दंड से बचने के उपाय।
कैरियर निर्माण में सहायक होगा ज्ञान
संजीव भारद्वाज ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीएसटी की सटीक जानकारी न केवल व्यवसायों को कानूनी संकट से बचाती है, बल्कि युवाओं के लिए स्वरोजगार और कंसल्टेंसी के नए द्वार भी खोलती है। उपस्थित विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से सवाल-जवाब किए और इस सत्र को अपने शैक्षणिक करियर के लिए मिल का पत्थर बताया।
उपस्थिति और संचालन:
कार्यक्रम का सफल संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्योत्सना गॉड ने किया। इस बौद्धिक समागम में वाणिज्य संकाय के प्रभारी डॉ. अश्वनी शर्मा, डॉ. आदेश कुमार तिवारी, डॉ. मनोज कुमार गुप्ता और डॉ. नीरज मनचंदा सहित विभाग के सभी वरिष्ठ प्राध्यापक उपस्थित रहे।

