असम में ‘सरमा’ रिटर्न्स: हिमंत बिस्वा सरमा ने दूसरी बार ली CM पद की शपथ, बोले- अभी तो बस ट्रेलर था, फिल्म बाकी है

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दिसपुर: पूर्वोत्तर की राजनीति के कद्दावर चेहरा हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर एक नया इतिहास रच दिया। उनका यह दूसरा कार्यकाल न केवल उनके नेतृत्व पर जनता के अटूट विश्वास का प्रमाण है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत में भारतीय जनता पार्टी की गहरी होती जड़ों का भी प्रतीक है। शपथ ग्रहण समारोह के बाद उनकी बेटी सुकन्या सरमा ने अपने पिता के समर्पण पर गर्व जताते हुए उन्हें इस सफलता का असली हकदार बताया।

​”नींद में भी असम की चिंता करते हैं पिता”

बेटी सुकन्या सरमा ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पिता असम की प्रगति के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने बताया, “असम का विकास उनके लिए केवल काम नहीं, बल्कि एक जुनून है; कई बार तो वे नींद में भी राज्य की भलाई और नई योजनाओं के बारे में बात करते हैं।” सुकन्या ने आगे कहा कि इतने व्यस्त राजनीतिक जीवन के बावजूद उन्होंने कभी परिवार को उपेक्षित महसूस नहीं होने दिया। उन्होंने और उनके भाई-मम्मी की हर छोटी जरूरत का हमेशा ख्याल रखा है।

​विवादों के बीच विकास का ‘ट्रेलर’ और ‘पिक्चर’

57 वर्षीय सरमा के लिए यह जीत आसान नहीं थी। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने उन पर और उनकी पत्नी पर तीखे हमले किए, लेकिन हिमंत अडिग रहे। अपनी आक्रामक शैली और कुशल रणनीति से उन्होंने असम में एनडीए को प्रचंड जीत दिलाई। शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने चिर-परिचित अंदाज में विपक्ष को संदेश देते हुए कहा कि पिछला कार्यकाल तो महज एक ‘ट्रेलर’ था, विकास की असली ‘फिल्म’ तो इस दूसरे कार्यकाल में दिखाई देगी।

​भविष्य की चुनौतियां और संकल्प

मुख्यमंत्री के रूप में अपनी नई पारी शुरू करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाना, जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर पहुंचाना और स्वदेशी समुदायों के भूमि अधिकारों की रक्षा करना है। हालांकि, उनका पिछला कार्यकाल ‘मियां’ मुसलमानों को लेकर दिए गए बयानों और अपनी सख्त नीतियों के कारण विवादों में भी रहा है। अब देखना यह होगा कि अपने दूसरे अध्याय में वे विवादों और विकास के बीच कैसे तालमेल बिठाते हैं।