राजस्‍थान के भरतपुर में आरक्षण के लिए सैनी समाज का आंदोलन जारी

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सैनी, माली, कुशवाहा, मौर्य और शाक्य समाज की ओर से 12 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर राजस्‍थान के भरतपुर जिले में 4 दिन से चल रहा आंदोलन अब पांचवें दिन भी जारी है। राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह और आरक्षण की मांग कर रहे नेताओं के बीच वार्ता को लेकर सहमति बनी है।

मिली जानकारी के अनुसार फुले आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे आंदोलन में आंदोलनकारियों की ओर से पहले 31 सदस्यों की सूची दी गई थी लेकिन सरकार ने इसे नहीं माना, अब 10 सदस्यों को सरकार के प्रतिनिधि के वार्ता के लिए चुना गया है, जिनकी मीटिंग आज कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह के साथ होगी। माना जा रहा है कि सिंह के मीटिंग के बाद सकारात्मक परिणाम निकल सकता है।

उधर मंत्री विश्वेंद्र सिंह सिंह ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि आंदोलन से आमजन परेशान हो रहा है। 45 डिग्री टेंपरेचर के बीच बुजुर्ग और महिलाएं बैठी हुई हैं, यदि कोई घटना घटित हुई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

क्यों कर रहे हैं सैनी समाज के लोग आंदोलन

आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि भरतपुर संभाग में सैनी, माली, काछी, मौर्य, कुशवाहा और शाक्य आदि ऐसी अनेक जातियां हैं, जिनका विकास अन्य जातियों के बराबर नहीं हो पाया है। इन जातियों में आईएएस आईपीएस आईएएस अधिकारी भी कम ही बन पाए हैं। इन जातियों का ज्यादातर धंधा फल और सब्जियां उगाना है, जिनके आधार पर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं।

हालांकि इन जातियों को आरक्षण की बेहद आवश्यकता है जिस तरह से गुर्जर समाज या मीणा समाज या अनुसूचित जाति को आरक्षण का लाभ मिल रहा है। भरतपुर संभाग में देखा जाए तो इन जातियों की स्थिति पिछड़ी हुई है । जो शिक्षा से भी वंचित ही रहे हैं और कृषि भूमि भी बेहद कम है।

क्या कहना है इन जातियों के नेताओं का

आंदोलन कर रहे नेता मुरारीलाल और बदन सिंह ने बताया कि हमारी जातियां हालांकि अन्य पिछड़ा वर्ग में आरक्षण ले रही हैं लेकिन हमें इस तरह का आरक्षण नहीं चाहिए। हमारी जातियों को 12% आरक्षण सबसे अलग चाहिए। जिस तरह से अनुसूचित जाति व जनजाति और गुर्जर समुदाय को विशेष आरक्षण प्राप्त है उसी तरह से हमारी जातियों को भी अलग से 12% आरक्षण दिया जाए।

-एजेंसियां

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