युद्ध के बीच ‘रसोई’ बचाने की जंग: भारत में लागू हुआ ESMA, घरेलू LPG और गाड़ियों की CNG को मिलेगी 100% सप्लाई

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नई दिल्ली: ईरान और इजराइल (अमेरिका) के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। भारत, जो अपनी एलपीजी (LPG) जरूरतों का करीब 80-85% हिस्सा आयात करता है, इस वक्त बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (ESMA/Essential Commodities Act) के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए गैस वितरण के लिए नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।

​सरकार का ‘मिशन रसोई’: किसे मिलेगी प्राथमिकता?

सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध के हालातों में भी आम आदमी की रसोई का चूल्हा जलता रहे। इसके लिए गैस आपूर्ति को चार अलग-अलग प्राथमिकता स्तरों में बांटा गया है:

​प्राथमिकता स्तर 1 (100% सप्लाई):

​घरेलू पाइपलाइन गैस (PNG) और वाहनों के लिए सीएनजी (CNG)।
​एलपीजी (LPG) उत्पादन और पाइपलाइन संचालन के लिए जरूरी ईंधन।
​इन क्षेत्रों को पिछले 6 महीनों की औसत खपत के बराबर पूरी सप्लाई मिलती रहेगी।

​प्राथमिकता स्तर 2 (70% सप्लाई):

​खेती के लिए जरूरी उर्वरक (फर्टिलाइजर) कारखानों को उनकी औसत खपत का केवल 70% हिस्सा ही दिया जाएगा।
​सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यह गैस केवल खाद बनाने में इस्तेमाल होगी और इसे किसी दूसरी यूनिट में ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।

​रिफाइनरियों के लिए कड़ा फरमान

​सरकार ने देश की तेल रिफाइनरियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन जैसे रसायनों का इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल या अन्य व्यावसायिक उत्पादों के बजाय अधिकतम LPG उत्पादन में करें। उत्पादित होने वाली पूरी गैस केवल तीन सरकारी कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) को ही दी जाएगी, ताकि इसकी कालाबाजारी रोकी जा सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य: भारत की दुखती रग

ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) प्रभावित हुआ है। यह वह समुद्री रास्ता है जहाँ से भारत की अधिकांश एलपीजी सप्लाई गुजरती है। इस रास्ते के बाधित होने से आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

​सरकार अब घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अमेरिका जैसे वैकल्पिक देशों से गैस आयात करने की योजना पर काम कर रही है ताकि देश के करोड़ों परिवारों को रसोई गैस की किल्लत से बचाया जा सके।