आगरा में ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ फैसला: पत्नी और मौसेरे भाई का फरसे से गला रेतने वाले पति, पिता और भाई को ‘सजा-ए-मौत’; गली में दौड़ाकर की थी हत्या

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​आगरा: ताजनगरी के एत्माद्दौला क्षेत्र में चार साल पहले हुए रोंगटे खड़े कर देने वाले दोहरे हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अवैध संबंधों के शक में अपनी ही पत्नी पूजा और मौसेरे भाई शिवम सिसौदिया की फरसे से काटकर निर्मम हत्या करने वाले तीन दोषियों पति गौरव, ससुर मदन और देवर अभिषेक को एडीजे-26 अमरदीप की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य कृत्य को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (विरलतम से विरल) मानते हुए दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

27 मई 2022: जब खून से लाल हो गई थी सुशील नगर की गली

यह खौफनाक वारदात 27 मई 2022 की दोपहर हुई थी। सुशील नगर निवासी शिवम सिसौदिया का अपने मौसा मदन के घर आना-जाना था। गौरव को अपनी पत्नी पूजा और शिवम के बीच नजदीकियों का शक था। वारदात वाले दिन जब शिवम पूजा से मिलने पहुँचा, तो गौरव, उसके पिता मदन और भाई अभिषेक ने दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया।

1 मिनट में 22 वार: सीसीटीवी ने खोली हैवानियत की पोल

​जांच और चश्मदीदों के मुताबिक, आरोपियों ने पूजा और शिवम को घर से घसीटकर बाहर गली में निकाला। उन्हें लाठी-डंडों से बेतहाशा पीटा गया और जब वे अधमरे होकर गिर पड़े, तो फरसे से उनके गले रेत दिए गए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, देवर अभिषेक ने शिवम पर महज 60 सेकंड में 22 बार फरसे से प्रहार किए। इस पूरी वारदात का सीसीटीवी फुटेज सामने आया था, जो अदालत में सबसे बड़ा और अकाट्य सबूत बना।

​हत्या के बाद लाश के पास रोता रहा पति, पिता-भाई ने किया सरेंडर

​वारदात के बाद का मंजर भयावह था। पूरी गली खून से सनी थी। हत्या के बाद आरोपी पति गौरव अपनी पत्नी की लाश के पास बैठकर रोता रहा, जबकि उसके पिता मदन और छोटे भाई अभिषेक ने थाने जाकर आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने मौके से हत्या में प्रयुक्त फरसा और खून से सना डंडा बरामद किया था।

14 गवाह और ठोस साक्ष्य: ऐसे मिली सजा-ए-मौत

एडीजीसी मोहित पाल ने बताया कि अभियोजन ने कोर्ट में कुल 14 गवाह पेश किए। शिवम के भाई अभिषेक की गवाही और सीसीटीवी फुटेज ने बचाव पक्ष की दलीलों को ध्वस्त कर दिया। अदालत ने माना कि यह हत्या पूरी तरह सुनियोजित और अत्यंत क्रूर थी। हालांकि, गौरव की माँ को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

​चेहरे पर नहीं पछतावा, बोले— “हाईकोर्ट जाएंगे”

फांसी की सजा सुनने के बाद भी तीनों दोषियों के चेहरे पर शिकन या पछतावा नहीं दिखा। कोर्ट से बाहर निकलते समय उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।