टैक्स कानूनों में बदलाव से बढ़ा अनुपालन का दबाव: ‘एकमा’ के संवाद कार्यक्रम में सीए विशेषज्ञों ने दूर कीं व्यापारियों की शंकाएं

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आगरा। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष में टैक्स कानूनों और डिजिटल अनुपालन (कंप्लायंस) में किए गए नए बदलावों ने देश सहित ताजनगरी के व्यापारियों व उद्योगपतियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। बदलते नियमों और बढ़ती सख्ती के कारण पैदा हुई व्यापारिक विसंगतियों को दूर करने के उद्देश्य से इंजीनियरिंग कंपोनेंट मैनुफैक्चरिंग एसोसिएशन (एकमा – ECMA) की ओर से वाटर वर्क्स स्थित ‘अतिथिवन’ में एक वृहद और बेहद महत्वपूर्ण व्यापारिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस विशेष संगोष्ठी में देश के जाने-माने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) और वित्तीय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और जीएसटी (GST) तथा आयकर (Income Tax) में आ रही व्यावहारिक जटिलताओं, तकनीकी समस्याओं और उनके कानूनी समाधानों पर स्थानीय उद्यमियों के साथ विस्तार से चर्चा की।

जीएसटी ट्रिब्यूनल अपील में रखें सावधानी, 1 अप्रैल से लागू हुए कड़े नियम: सीए निखिल गुप्ता

संवाद कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं सुप्रसिद्ध टैक्स विशेषज्ञ सीए निखिल गुप्ता ने माल एवं सेवा कर (GST) के कानूनी पहलुओं को समझाते हुए बताया कि जीएसटी अपील, विशेषकर हाल ही में गठित हुए जीएसटी ट्रिब्यूनल (GST Tribunal) में जाते समय व्यापारियों को बहुत अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कारोबारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर ही अपनी अपील दाखिल करनी चाहिए। इसके साथ ही आवश्यक प्री-डिपॉजिट (Pre-Deposit) की राशि समय पर जमा करने, सभी संबंधित दस्तावेजों व रिटर्न का बारीकी से मिलान रखने, फर्जी आईटीसी (Fake ITC) के जाल से दूर रहने और बिना ई-वे बिल (E-Way Bill) वाले किसी भी प्रकार के संदिग्ध लेनदेन से पूरी तरह बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विभाग से आने वाले किसी भी कारण बताओ नोटिस का समय पर तथ्यात्मक जवाब देना कानूनी रूप से बेहद जरूरी है।

​सीए निखिल गुप्ता ने आगे तकनीकी बदलावों की जानकारी देते हुए बताया कि एक अप्रैल से जीएसटी के नियमों में कई बड़े नीतिगत बदलाव लागू किए गए हैं। इनमें ई-इनवॉइसिंग (E-Invoicing) की अनिवार्य टर्नओवर सीमा में बड़ा संशोधन किया गया है, साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के मिलान की शर्तों को पहले से कहीं अधिक कड़ा और पारदर्शी बना दिया गया है।

व्यापारियों को बड़ी राहत की खबर देते हुए उन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के हालिया ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अब यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि केवल छोटी-मोटी तकनीकी या लिपिकीय त्रुटियों (Technical Errors) के आधार पर किसी भी वास्तविक और ईमानदार व्यापारी का वैध इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पूरी तरह से नहीं रोका जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, अदालत ने यह भी साफ किया है कि किसी भी प्रकार की विभागीय कार्रवाई या पेनल्टी लगाने के दौरान ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों’ (Principles of Natural Justice) का कड़ाई से पालन होना अनिवार्य है। वहीं, राहत की बात यह है कि जीएसटी पोर्टल पर आए नए डिजिटल अपडेट के तहत अब नोटिस ट्रैकिंग और अपील फाइलिंग की पूरी प्रक्रिया को पहले से काफी आसान और पूरी तरह से पेपरलेस (डिजिटल) बना दिया गया है।

​डिजिटल अनुपालन से बढ़ी छोटे और पारंपरिक कारोबारियों की मुसीबत: सीए अरविंद अग्रवाल

​कार्यक्रम के दूसरे मुख्य वक्ता और जाने-माने आयकर विशेषज्ञ सीए अरविंद अग्रवाल ने डायरेक्ट टैक्स में हुए बदलावों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने बताया कि इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) में हुए हालिया और कड़े बदलावों के कारण अब भारत में व्यापारियों के लिए ऑनलाइन और डिजिटल अनुपालन का दायित्व बहुत अधिक बढ़ गया है। इस नई व्यवस्था के चलते देश की छोटी व्यावसायिक फर्मों और पारंपरिक रूप से बही-खाता रखने वाले छोटे व्यापारियों पर प्रतिदिन के वित्तीय रिकॉर्ड को तत्काल अपडेट रखने का एक मानसिक और प्रशासनिक दबाव देखा जा रहा है।

​उन्होंने तकनीकी बारीकियों को समझाते हुए आगाह किया कि टीडीएस (TDS) और टीसीएस (TCS) नियमों में लाई गई अत्यधिक सख्ती, बैंकिंग ट्रांजैक्शन की चौबीसों घंटे ऑटोमेटेड निगरानी और व्यापारी के आय-व्यय के डेटा मिलान (Data Matching) की ऑनलाइन स्क्रूटनी के कारण अब जरा सी भी मानवीय गलती होने पर सीधे पोर्टल से नोटिस आने की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है।

विभाग का एआई (AI) सिस्टम मामूली विसंगति को भी तुरंत पकड़ रहा है। बार-बार आयकर पोर्टल पर होने वाले नए तकनीकी अपडेट, लगातार बदलते नियम और तय समय सीमा के भीतर ही रिटर्न फाइल करने की कानूनी अनिवार्यता के कारण, अब हमारे छोटे और मझोले व्यापारियों को पेशेवर तकनीकी जानकारी तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की विशेषज्ञ सलाह की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस हो रही है।

शंकाओं का हुआ समाधान, इन प्रमुख उद्यमियों की रही उपस्थिति

इस सफल संवाद कार्यक्रम के मुख्य संयोजक अमित मित्तल ने मंच का कुशल संचालन करते हुए उपस्थित सैकड़ों व्यापारियों की व्यक्तिगत व्यापारिक शंकाओं और केस स्टडीज को विशेषज्ञों के सामने रखा और जीएसटी व आयकर की क्लिष्ट प्रक्रियाओं को बेहद सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया।

कार्यक्रम के समापन पर ‘एकमा’ के अध्यक्ष अतुल गोयल ने सभी अतिथि वक्ताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और शहर के उद्योगपतियों का इस ज्ञानवर्धक सत्र में शामिल होने के लिए खुले दिल से आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया।

​इस महत्वपूर्ण वित्तीय संगोष्ठी के अवसर पर मुख्य रूप से एसोसिएशन के सचिव मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल, उपाध्यक्ष नितिन गर्ग, वरिष्ठ उद्यमी उमेश बंसल, योगेश राय, मनोज गर्ग, दीपेंद्र बंसल, सुलभ गर्ग, अमित जैन, अतुल गुप्ता, संजय सहित आगरा औद्योगिक क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यापारी, कर सलाहकार और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े प्रबुद्ध उद्यमी मौजूद रहे।