आगरा। दीपोत्सव के पावन पर्व की खुशियों और बाजारों की रौनक के बीच आगरा की आबोहवा लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। दीपावली की रात होने वाली मुख्य आतिशबाजी से पहले ही शहर की हवा प्रदूषण के बोझ तले दब चुकी है। वाहनों का धुआं, सड़कों पर लगता भीषण जाम, अनियंत्रित निर्माण कार्यों से उड़ती धूल और खुले में फैली मिट्टी ने वातावरण को बेहद खराब कर दिया है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 188 दर्ज किया गया, जबकि व्यावसायिक केंद्र संजय प्लेस में यह उछलकर 279 तक जा पहुंचा।
शहर के विभिन्न इलाकों का हाल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रयोगशाला द्वारा जारी आंकड़े शहर के अलग-अलग हिस्सों में बिगड़ती आबोहवा की तस्दीक करते हैं:
संजय प्लेस: 279 (शहर में सर्वाधिक खतरनाक स्तर)
मनोहरपुर: 193
शाहजहां गार्डन: 177
रोहता क्षेत्र: 176
आवास विकास कॉलोनी: 175
शास्त्रीपुरम: 146
इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदूषण का यह संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित न होकर पूरे शहर को अपनी चपेट में ले चुका है। संजय प्लेस में पीएम-2.5 का स्तर निर्धारित मानक से करीब चार गुना अधिक पहुंचना चिंता का बड़ा विषय है।
जाम और निर्माण की धूल ने पहले ही बिगाड़ी हवा
शहर में बेकाबू होती वाहनों की संख्या और जगह-जगह लगने वाला जाम प्रदूषण बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहा है। धनतेरस और दीपावली के चलते बाजारों तथा प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। रेंगते और आइडलिंग मोड में खड़े वाहनों से निकलने वाला धुआं लगातार हवा में जहरीले तत्व घोल रहा है। इसके अलावा, सड़कों की खुदाई, अनियोजित निर्माण स्थलों और खुले में पड़ी निर्माण सामग्री से उड़ने वाले धूल कणों ने स्थिति को और बदतर बना दिया है।
आतिशबाजी के बाद और गंभीर हो सकती है स्थिति
जब बिना किसी बड़े पैमाने की आतिशबाजी के शहर का AQI 188 और संजय प्लेस में 279 तक पहुंच चुका है, तो दीपावली की रात होने वाली आतिशबाजी इस स्थिति को और खतरनाक स्तर पर ले जा सकती है। पटाखों से निकलने वाले सूक्ष्म कण (PM2.5 और PM10), सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड हवा में घुलकर श्वसन नली को प्रभावित करते हैं। रात और सुबह के समय कम हवा की गति के कारण इन प्रदूषक कणों का धरातल के पास जमा होना स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकता है।
सांस के मरीजों के लिए बढ़ी मुश्किलें
दूषित और जहरीली हवा का सबसे बुरा प्रभाव अस्थमा, दमा, हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के साथ-साथ बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। एसएन मेडिकल कॉलेज में सांस, नाक, गले और आंखों की एलर्जी से जूझने वाले मरीजों की आमद तेजी से बढ़ रही है।
चिकित्सकों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें, धूल-धुएं के संपर्क में आने से खुद को बचाएं और घर से बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क का उपयोग अवश्य करें।

