दोहा: कतर की राजधानी दोहा में रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयां देने और अपनी सैन्य क्षमताओं को संयुक्त रूप से बढ़ाने के उद्देश्य से एक अहम रणनीतिक कदम उठाया गया है। बुधवार को पाकिस्तान, तुर्की, कतर और इंडोनेशिया ने आपसी रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए ‘बद्र समझौता ज्ञापन’ (Badr MoU) पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए। तुर्की रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य चारों देशों के बीच रक्षा उत्पादन, उन्नत सैन्य प्रशिक्षण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना है। खास बात यह है कि यह नया समझौता कुछ महीने पहले हुए ‘मक्का पैक्ट’ से पूरी तरह अलग है।
दोहा में हुआ ऐतिहासिक समझौतों का हस्ताक्षर
कतर की राजधानी दोहा में आयोजित इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम के दौरान चारों देशों के शीर्ष रक्षा प्रतिनिधियों ने इस समझौते पर मुहर लगाई। इस पहल का मुख्य जोर चारों देशों की रक्षा औद्योगिक क्षमताओं का बेहतर उपयोग करते हुए साझीदारियों को आगे बढ़ाना है। तुर्की के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से इस समझौते से जुड़े वीडियो क्लिप्स और महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस बहुराष्ट्रीय पहल से चारों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच आपसी तालमेल बेहतर होगा, उत्पादन क्षमता को मजबूती मिलेगी और मित्र देशों की रक्षा जरूरतों को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। इस समझौते के दायरे में तकनीकी सैन्य प्रशिक्षण तथा अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) के क्षेत्र में सहयोग शामिल है।
किस-किस ने किए हस्ताक्षर?
पाकिस्तानी दैनिक ‘डॉन’ के अनुसार, इस समझौते को लेकर पाकिस्तान की शरीफ सरकार की ओर से शुरुआती दौर में कोई बड़ा खुलासा नहीं किया गया था, लेकिन बाद में इसकी पुष्टि सामने आई। पाकिस्तान की ओर से देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। उनके अलावा तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलर, कतर के उपप्रधानमंत्री एवं रक्षा मामलों के प्रभारी शेख सऊद बिन अब्दुलरहमान और इंडोनेशिया के उपरक्षा मंत्री युसुफ जुहारी ने भी इस ऐतिहासिक समझौते पर अपने हस्ताक्षर किए।
बद्र समझौते के प्रमुख बिंदु
इस समझौते के तहत निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देने की बात कही गई है:
सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण: आपसी सामंजस्य बढ़ाने के लिए संयुक्त सैन्य अभ्यासों का आयोजन और तकनीकी प्रशिक्षण।
रक्षा अनुसंधान और विकास: आधुनिक रक्षा प्रणालियों के विकास के अनुरूप औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाना।
संयुक्त उत्पादन: चारों देशों के रक्षा उद्योगों को बेहतर बनाने और रक्षा उपकरणों के निर्माण में सहभागिता।
हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार, ‘बद्र’ समझौते के तहत फिलहाल किसी विशिष्ट हथियार प्रणाली, विशेष संयुक्त उत्पादन परियोजना या सैन्य तैनाती की घोषणा नहीं की गई है।
’मक्का पैक्ट’ से कितना अलग है यह समझौता?
यह रणनीतिक समझौता ऐसे समय में सामने आया है, जब तुर्की लगातार पाकिस्तान और खाड़ी देशों के साथ अपने रक्षा संबंधों का दायरा बढ़ाता जा रहा है। इससे पहले 7 अगस्त को तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक अलग संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे ‘मक्का पैक्ट’ के नाम से जाना जाता है। उस समझौते के तहत प्रावधान है कि किसी एक देश पर हुआ हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके विपरीत, नया ‘बद्र समझौता’ मुख्य रूप से रक्षा औद्योगिक क्षमताओं, तकनीकी प्रशिक्षण और उत्पादन तालमेल पर केंद्रित है।
