नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चली 12 घंटे से अधिक की लंबी और तीखी बहस के बाद, स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किए गए इस संकल्प पर सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुरजोर पलटवार किया। सदन में भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा, जिसे सदन ने सर्वसम्मति (ध्वनिमत) से अस्वीकृत कर दिया।
नियमों पर अमित शाह की नसीहत: “सदन कोई बाजार नहीं”
चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को संवैधानिक मर्यादाओं का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना न केवल अफसोसजनक है, बल्कि यह संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।
शाह ने दो-टूक शब्दों में कहा ”अध्यक्ष सदन के निष्पक्ष संरक्षक होते हैं। सदन आपसी विश्वास से चलता है, यह कोई बाजार नहीं है कि यहाँ नियमों की अनदेखी की जाए। सदस्यों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रक्रियाओं के दायरे में रहकर ही अपनी बात रखें।”
राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर हंगामा और नारेबाजी
बहस उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गई जब अमित शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सदन में उपस्थिति के आंकड़े पेश किए और महत्वपूर्ण मौकों पर उनकी गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए। इस टिप्पणी से बिफरे विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर ‘अमित शाह माफी मांगो’ के नारे लगाए। शाह के एक विशिष्ट शब्द पर आपत्ति जताते हुए विपक्ष ने सदन की कार्यवाही बाधित करने की कोशिश की, लेकिन शाह ने अपने आक्रामक तेवर बरकरार रखते हुए जवाब पूरा किया।
सदन से बाहर रहे ओम बिरला
परंपरा और नैतिकता का पालन करते हुए, जब उनके खिलाफ संकल्प पर चर्चा और मतदान हो रहा था, तब स्पीकर ओम बिरला सदन में उपस्थित नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति में जगदंबिका पाल ने आसन संभाला। शाह ने यह भी याद दिलाया कि इतिहास में जब भी ऐसे प्रस्ताव आए हैं, वे ध्वनिमत से ही खारिज हुए हैं और विपक्ष को इस ‘मुगालते’ में नहीं रहना चाहिए कि वे नियमों से ऊपर हैं।
अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के साथ ही सत्ता पक्ष ने इसे अपनी नैतिक जीत बताया है, जबकि विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने का प्रयास करार दिया।

