जदयू में ‘निशांत’ उदय: भव्य समारोह में ली पार्टी की सदस्यता, नीतीश की विरासत संभालने को तैयार

Politics

पटना। बिहार के सियासी गलियारों में वर्षों से चल रही अटकलों पर आज विराम लग गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार रविवार को गाजे-बाजे और भव्य समारोह के साथ आधिकारिक तौर पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में शामिल हो गए। पटना स्थित जदयू मुख्यालय के कर्पूरी ठाकुर सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम को पार्टी ने एक ‘उत्सव’ की तरह मनाया, जिसे प्रदेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।

संजय झा ने दिलाई सदस्यता

​जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने निशांत कुमार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई। इस दौरान संजय झा ने उन्हें पार्टी की टोपी पहनाई और गले में जदयू की पट्टिका डालकर स्वागत किया। सभागार में मौजूद हजारों कार्यकर्ताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट और नारों के साथ इस पल का स्वागत किया।

​नीतीश के राज्यसभा जाने पर तोड़ी चुप्पी

पिछले कुछ दिनों से विपक्षी दल, विशेषकर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव, यह दावा कर रहे थे कि भाजपा ने नीतीश कुमार को ‘जबरन’ राज्यसभा भेज दिया है। सदस्यता लेने के बाद निशांत कुमार ने इस पर दो टूक कहा, “पिताजी का राज्यसभा जाने का फैसला पूरी तरह उनका निजी निर्णय है। मैं उनके इस फैसले का दिल से सम्मान करता हूँ और इसे पूरी तरह स्वीकार करता हूँ।” इस बयान के जरिए उन्होंने विपक्ष के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

​”पिता के विजन को जनता तक ले जाऊंगा”

​अपनी प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए निशांत भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “पिछले 20 वर्षों में पिताजी ने बिहार के विकास के लिए जो काम किए हैं, मैं उनके उसी विजन और विकास कार्यों को बिहार के जन-जन तक पहुँचाने का काम करूँगा। मैं पार्टी की मजबूती के लिए समर्पित रहूँगा।”

​विपक्ष और समर्थकों की प्रतिक्रिया

निशांत की एंट्री पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने दिलचस्प प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार को बहुत पहले राजनीति में आ जाना चाहिए था। पप्पू यादव के मुताबिक, निशांत में जेडीयू को एकजुट रखने और नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को सहेजने की पूरी क्षमता है।

​क्यों अहम है यह ‘एंट्री’?

निशांत कुमार का राजनीति में आना जदयू के लिए एक ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकता है। ऐसे समय में जब नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति (राज्यसभा) की ओर रुख कर रहे हैं, निशांत की मौजूदगी पार्टी के कैडर को यह संदेश देने की कोशिश है कि नेतृत्व अब युवा हाथों में सुरक्षित है।