नेशनल हेरल्ड केस: 5 लाख रुपए की पूंजी मात्र 12 वर्षों में कैसे बन गई 800 करोड़ रुपये की

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी सोमवार को (आज) नेशनल हेरल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) के सामने पेश हुए। ईडी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे को पूछताछ के लिए समन भेजा था। सोनिया को 8 जून को जबकि राहुल को 2 जून को ही बुलाया गया था लेकिन उन्होंने विदेश में होने की वजह से मोहलत मांगी।

राहुल आज सोमवार (13 जून) को ईडी के सामने पेश हुए। मनी लॉन्ड्रिंग का ये पूरा मामला 2010 में बनी गांधी परिवार के स्वामित्व वाली एक कंपनी ‘यंग इंडियन लिमिटेड’ से जुड़ा है जो 5 लाख की पूंजी से शुरू हुई थी लेकिन ईडी के मुताबिक आज उसके पास करीब 800 करोड़ रुपये की संपत्ति है। वह भी तब, जबकि कंपनी कथित तौर पर किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल नहीं है। संपत्ति में ये इजाफा सिर्फ एक सौदे की वजह से हुआ- ये सौदा था नेशनल हेरल्ड का प्रकाशन करने वाली कंपनी असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के अधिग्रहण से।

आइए समझते हैं पूरा मामला

पूरे मामले को संक्षेप में समझें तो ये है कि 1938 में पंडित जवाहर लाल नेहरू की अगुआई में सैकड़ों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने मिलकर एक कंपनी बनाई असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL)। इस कंपनी को बनाने का मकसद बताया गया क्रांतिकारी अखबार शुरू करना और उनके जरिए आजादी की लड़ाई को तेज करना। कंपनी पर किसी एक शख्स का नियंत्रण या अधिकार नहीं था।

कंपनी ने नेशनल हेरल्ड नाम से अंग्रेजी, कौमी आवाज नाम से उर्दू और नवजीवन नाम से हिंदी में अखबार निकालना शुरू कर दिया। AJL में नेहरू के अलावा 5000 दूसरे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी शेयर होल्डर थे।

आजादी के बाद ये तीनों अखबार कांग्रेस के मुखपत्र बन गए। AJL के पास दिल्ली, मुंबई, पंचकुला, लखनऊ और पटना में प्राइम लोकेशन पर प्रॉपर्टी थीं। 2008 में AJL ने नेशनल हेरल्ड का प्रकाशन बंद कर दिया क्योंकि उसकी माली हालत ठीक नहीं थी। उस पर कांग्रेस पार्टी का 90 करोड़ रुपये का कर्ज था। 2010 में भी AJL के 1057 शेयर होल्डर थे। 2010 में यंग इंडियन लिमिटेड नाम की एक कंपनी ने AJL को खरीद लिया। खास बात ये कि ये कंपनी सिर्फ 3 महीने पहले ही 5 लाख रुपये की पूंजी से बनी थी और इसका स्वामित्व गांधी परिवार के पास था। सोनिया गांधी, उनके दोनों बच्चों राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम यंग इंडियन लिमिटेड के मेजॉरिटी शेयर हैं। इस तरह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की बनाई एक कंपनी और उसकी संपत्तियों पर एक परिवार का कब्जा हो गया।

मामला कैसे सामने आया

यंग इंडिया लिमिटेड ने असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड के 99 प्रतिशत शेयर का अधिग्रहण कर लिया। मामला तब खुला जब AJL के कई शेयर होल्डर्स ने सौदे पर ये कहकर सवाल उठाया कि उन्हें इसकी कोई जानकारी ही नहीं दी गई और न ही उनकी सहमति ली गई जबकि शेयर होल्डर के नाते ये उनका हक था। इन शेयर होल्डर्स में पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण और इलाहाबाद व मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस मार्केंडेय काटजू भी शामिल थे। इन लोगों के पिता AJL में शेयर होल्डर थे, इस नाते उनके निधन के बाद शेयरों पर उनका स्वामित्व था। दरअसल, सौदे से पहले ही 2010 में तमाम शेयर होल्डर्स के शेयरों को AJL के नाम ट्रांसफर कर दिया गया, वो भी संबंधित शेयर होल्डर्स को बिना कोई नोटिस या जानकारी दिए हुए।

2012-13 में बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी पूरे मामले को लेकर अदालत में चले गए। दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका के तहत उन्होंने आरोप लगाया कि यंग इंडिया लिमिटेड द्वारा AJL का अधिग्रहण गैरकानूनी तौर पर हुआ है। ये धोखाधड़ी और ब्रीच ऑफ ट्रस्ट (विश्वासभंजन) का मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि YIL ने सिर्फ 50 लाख रुपये देकर AJL के 90 करोड़ रुपये के कर्ज की वसूली का अधिकार ले लिया और 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की सपत्तियों का मालिकाना हक हासिल कर लिया।

कहानी यंग इंडियन लिमिटेड की

2008 में AJL ने ‘घाटे’ की वजह से अखबारों का प्रकाशन बंद कर दिया। उस वक्त उस पर कांग्रेस पार्टी का 90 करोड़ रुपये का कर्ज था। इसी के बाद सीन में गांधी परिवार और उनके करीबियों की एंट्री होती है। नवंबर 2010 में यंग इंडिया लिमिटेड नाम की एक कंपनी बनती है। ध्यान देने वाली बात ये भी है कि उस वक्त केंद्र में कांग्रेस की अगुआई में यूपीए की सरकार थी। उस कंपनी के डायरेक्टर कोई और नहीं कांग्रेस के तत्कालीन महासचिव राहुल गांधी थे। YIL में राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी का 76 प्रतिशत शेयर है। बाकी बचे 24 प्रतिशत शेयर गांधी परिवार के करीबियों मोतीलाल वोरा (2020 में निधन हो गया) और ऑस्कर फर्नांडीज (2021 में निधन) के नाम था।

यंग इंडियन कंपनी के वजूद में आने से पहले ही उसे हासिल हो गई थी टैक्स छूट!

यंग इंडियन कंपनी को कंपनी एक्ट की धारा 25 के तहत टैक्स जमा करने की छूट मिली हुई थी। इसका आधार ये रहा कि ये कंपनी एक चैरिटेबल नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन है। 29 मार्च 2011 को यंग इंडियन लिमिटेड ने इनकम टैक्स से छूट पाने के लिए आवेदन दिया। तब केंद्र में कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार थी। 9 मई 2011 को YIL की अर्जी मंजूर कर ली गई यानी उसे इनकम टैक्स से मुक्त कर दिया गया।

आदेश 2010-11 से ही प्रभावी कर दिया गया यानी कंपनी को तब से कर छूट हासिल हो गई जब वह वजूद तक में नहीं आई थी और इस बेनिफिट के लिए आवेदन तक नहीं किया था। इस मामले को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच भी चल रही है। आईटी नोटिस के खिलाफ सोनिया और राहुल 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट भी गए लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। हाई कोर्ट के फैसले को कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी आईटी नोटिस रद्द करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कांग्रेस की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में इनकम टैक्स की जांच चलती रहेगी।

कर्ज का खेल और AJL का अधिग्रहण

AJL पर कांग्रेस का 90 करोड़ रुपये का कर्ज था। कांग्रेस ने इस कर्ज की वसूली का अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के मेजॉरिटी शेयर वाली कंपनी YIL को दे दिया। इसके लिए YIL ने 50 लाख रुपये कांग्रेस को दिए और 90 करोड़ रुपये कर्ज की वसूली का अधिकार हासिल कर लिया। कर्ज वसूली के लिए YIL ने नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों का अधिग्रहण कर लिया। सुब्रमण्यन स्वामी का आरोप है कि कांग्रेस ने YIL को 90 करोड़ रुपये के कर्ज की वसूली का अधिकार दिया गया और उसके नाम पर YIL ने AJL के 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रियल एस्टेट का अधिग्रहण कर लिया।

5 लाख की पूंजी से शुरू हुई YIL के पास हो गई 800 करोड़ की संपत्ति

ईडी के मुताबिक YIL की 2010 में जब स्थापना हुई तब उसका शेयर कैपिटल महज 5 लाख रुपये था। जल्द ही उसे कोलकाता से चलने वाली एक कथित शेल कंपनी (मुखौटा/सिर्फ कागज पर चलने वाली कंपनी) से 1 करोड़ रुपये का लोन मिला ताकि ये AJL और उसकी सभी संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए कांग्रेस के साथ सौदा कर सके। इसी 1 करोड़ रुपये में से YIL ने कांग्रेस को 50 लाख रुपये दिए और AJL से 90 करोड़ रुपये के कर्ज की वसूली का अधिकार हासिल किया और आखिरकार उसकी सभी संपत्तियों का अधिग्रहण ही कर लिया। ईडी के मुताबिक 2010 में 5 लाख रुपये की पूंजी से शुरू होने वाली गांधी परिवार के नियंत्रण वाली YIL के पास आज देशभर में 800 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां हैं। इसमें दिल्ली में ITO के नजदीक बहादुर शाह जफर मार्ग पर प्राइम लोकेशन पर स्थित हेराल्ड हाउस भी शामिल है।

हेराल्ड हाउस में पासपोर्ट ऑफिस है जिसके लिए सरकार YIL को किराया देती है। इसके अलावा YIL के पास हरियाणा के पंचकूला में 65 करोड़ रुपये मूल्य का प्लॉट है। ये प्लॉट पहले AJL के नाम था। मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के सिलसिले में ईडी ने 3 दिसंबर 2018 को इस संपत्ति को अटैच कर दिया। इसी तरह 2018 में केंद्रीय शहरी और आवास विकास मंत्रालय ने हेराल्ड हाउस की लीज डीड इस आधार पर कैंसल कर दी कि जिन शर्तों पर 1962 में हेराल्ड हाउस का आवंटन हुआ था, उन शर्तों का पालन नहीं हो रहा। आवंटन मिला था अखबार प्रकाशित करने के लिए लेकिन अखबार का प्रकाशन नहीं हो रहा और संपत्ति को किराये पर देकर कॉमर्शियल फायदा लिया जा रहा है।

नेशनल हेराल्ड केस में अब तक ED की कार्रवाई

2016 में ईडी ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। ये केस सीबीआई की एक एफआईआर पर आधारित था।

2016 में ईडी ने AJL को कांग्रेस की तरफ से कथित तौर पर दिए गए 90 करोड़ रुपये कर्ज देने के मामले की जांच शुरू की। जब YIL ने AJL का अधिग्रहण किया तो ये कर्ज बाद में माफ कर दिया गया था। इसके बदले में कांग्रेस को YIL से 50 लाख रुपये मिले।

3 दिसंबर 2018 को ईडी ने पंचकूला स्थित AJL के एक प्लॉट को अटैच कर दिया। उस प्लॉट का बाजार मूल्य 65 करोड़ रुपये था जो AJL से जुड़ा था और जिस पर YIL का स्वामित्व था।

2022 में ईडी ने यंग इंडियन और सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत इसके पदाधिकारियों व शेयरहोल्डरों के खिलाफ एक और जांच शुरू की।

11-12 अप्रैल 2022 को ईडी ने कांग्रेस नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन बंसल से पूछताछ की।

-एजेंसियां