आगरा: उत्तर प्रदेश के राज्य कर विभाग और व्यापारिक समुदाय के बीच आपसी तालमेल और सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के सभागार में एक महत्वपूर्ण ‘व्यापारी संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान चैम्बर ने माल और सेवा कर (GST) से जुड़े कई अहम और व्यावहारिक मुद्दे उठाते हुए सरकार से तत्काल सुधारों की पुरजोर मांग की।
चैम्बर की ओर से प्रमुख रूप से स्क्रैप (कबाड़) कारोबार को रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) के दायरे में लाने, किसी भी आपूर्तिकर्ता (सप्लायर) फर्म का ‘रिस्क स्कोर’ सीधे व्यापारियों के जीएसटी पोर्टल पर प्रदर्शित करने तथा एग्रीकल्चर व इंडस्ट्रियल पंपसेट पर जीएसटी की दर को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने के बहुमूल्य सुझाव दिए गए।
राज्य कर विभाग आगरा द्वारा आयोजित इस संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता नेशनल चैम्बर के अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने की। इस उच्चस्तरीय बैठक में संयुक्त आयुक्त राज्य कर ए.के. सिंह सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने उद्यमियों और व्यापारियों की एक-एक समस्या को बहुत ही गंभीरता से सुना। कार्यक्रम का कुशल संचालन पूर्व अध्यक्ष एवं जीएसटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन अमर मित्तल द्वारा किया गया।
इस दौरान बैठक में आगरा आयरन फाउंड्री उद्योग एसोसिएशन, इंजीनियरिंग कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन और यूपी डीजल इंजन मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन से जुड़े तमाम प्रमुख उद्यमियों ने हिस्सा लिया और फाउंड्री उद्योग, मशीनरी निर्माण तथा टैक्स अनुपालन से जुड़ी अपनी व्यावहारिक कठिनाइयां खुलकर साझा कीं।
स्क्रैप कारोबार में फर्जीवाड़े पर रोक और रिस्क स्कोर की मांग
चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल और जीएसटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन अमर मित्तल ने विभाग के सामने यह बात प्रमुखता से रखी कि स्क्रैप चेन में कई बार कुछ फर्जी और बोगस व्यापारी गलत तरीके से कारोबार करके अचानक गायब हो जाते हैं, जिसका खामियाजा अंततः देश के वास्तविक और ईमानदार उद्यमियों को अनावश्यक विभागीय कार्रवाई और भारी आर्थिक नुकसान के रूप में भुगतना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यप्रणाली से ईमानदार व्यापारियों का उत्पीड़न होता है। इस गंभीर समस्या के पुख्ता समाधान के लिए चैम्बर ने मांग की कि स्क्रैप व्यापार को अनिवार्य रूप से आरसीएम (RCM) के अंतर्गत लाया जाए।
इसके साथ ही, चैम्बर ने यह भी सुझाव दिया कि किसी भी आपूर्तिकर्ता फर्म का ‘रिस्क स्कोर’ (Risk Score) सीधे व्यापारी के अपने जीएसटी पोर्टल पर ऑनलाइन दिखना चाहिए, ताकि व्यापारी किसी भी नई फर्म के साथ व्यापारिक लेन-देन करने से पहले पूरी तरह सतर्क रह सकें और विभाग के साथ एक पारदर्शी समन्वय बना रहे।
पंपसेट पर जीएसटी दर घटाने की पुरजोर मांग
चैम्बर के पदाधिकारियों ने विभाग का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि डीजल इंजनों पर जीएसटी की दर को पहले ही 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जा चुका है, लेकिन सेंट्रीफ्यूगल डीजल वाटर पंपसेट और उसके विभिन्न स्पेयर पार्ट्स पर अभी भी भारी-भरकम 18 प्रतिशत जीएसटी लागू है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पंपसेट पर भी कर की दर को तर्कसंगत बनाते हुए 5 प्रतिशत किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि डीजल पंपसेट में इंजन और पंप दोनों पर अलग-अलग टैक्स स्लैब होने के कारण उद्योगों को संयुक्त उत्पाद (कंबाइंड प्रोडक्ट) बेचने में भारी व्यावसायिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा बैठक में ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) की प्रतिबंधात्मक व्यवस्थाओं के कारण फाउंड्री उद्योग पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों और लोहे के पंजीयन में आवश्यक नियंत्रण लागू करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
उद्यमियों ने रखी अपनी समस्याएं, अधिकारियों ने दिया सकारात्मक आश्वासन
बैठक के दौरान फाउंड्री एसोसिएशन की तरफ से अशोक सिंघल, सुनील सिंघल और शैलेश गुप्ता ने अपने उद्योग से जुड़ी जमीनी समस्याएं रखीं। वहीं, इंजीनियरिंग कंपोनेंट उद्योग की ओर से अतुल गोयल और मुकेश जैन ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रस्तुत किए।
राज्य कर विभाग की तरफ से संयुक्त आयुक्त ए.के. सिंह के अलावा उपायुक्त जितेंद्र कुमार, सत्येंद्र कुमार सिंह, अशोक सिंह और अखंड प्रताप सिंह ने व्यापारियों के तमाम सवालों का बहुत ही सकारात्मक तरीके से समाधान किया और खुला संवाद स्थापित किया।
संयुक्त आयुक्त ए.के. सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश की सरकार हमेशा से व्यापारी हितों को सर्वोपरि रखकर लगातार कार्य कर रही है। इस तरह के आयोजनों से विभाग और व्यापारियों के बीच की दूरी कम होती है, सीधा संपर्क स्थापित होता है और आपसी भ्रांतियां दूर होती हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि व्यापारियों से मिलने वाले इन सभी रचनात्मक सुझावों को उच्च स्तर पर भेजकर जीएसटी नीतियों को और अधिक सुगम बनाने में सहायता ली जाएगी।
प्रमुख लोगों की उपस्थिति
इस संवाद कार्यक्रम में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, उपाध्यक्ष नितेश अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष एवं जीएसटी प्रकोष्ठ चेयरमैन अमर मित्तल, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र सिंह, सुनील सिंघल, संजय कुमार गोयल, अमित जैन, अंशुल अग्रवाल, अतुल गोयल, उमेश बंसल, मनोज अग्रवाल, मुकेश जैन, अमित, संजय, नवनीत बंसल, दीपक अग्रवाल, आशीष बंसल, शैलेश अग्रवाल, जितेंद्र कुमार गुप्ता, दीपेंद्र बंसल, दिलीप अग्रवाल, अनुराग, विष्णु शर्मा, श्रीकिशन अग्रवाल, शलभ गुप्ता, नितिन गोयल और योगेश सिंघल सहित बड़ी संख्या में शहर के नामचीन उद्यमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र सिंह द्वारा किया गया।


