नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बसपा सुप्रीमो मायावती के दावों को नकारा, कहा- जनता के जनादेश को षड्यंत्र न कहें

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की ओर से आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ सांठगांठ होने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। बसपा सुप्रीमो के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है, और अब चंद्रशेखर आजाद ने इन सभी आरोपों पर खुलकर पलटवार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा बयान साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है।

चंद्रशेखर आजाद ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उन्होंने बहनजी मायावती द्वारा की गई आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव आयोग, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और नगीना लोकसभा चुनाव को लेकर उनके संबंध में कही गई तमाम बातों को बहुत ध्यान से सुना है।

अपने जवाब में चंद्रशेखर ने आगे लिखा कि बहनजी का यह लिखित प्रेस नोट चाहे देश में कहीं से भी लिखकर तैयार होकर आया हो, लेकिन उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि जो लोग कभी सार्वजनिक रूप से यह सवाल किया करते थे कि “कौन चंद्रशेखर?”, उन्हें इस देश की आम जनता ने अब खुद यह बता दिया है कि उनके हक के लिए लड़ने वाला और सड़कों पर उतरकर संघर्ष करने वाला असली चंद्रशेखर कौन है। उन्होंने इस बात पर भी संतोष जताया कि अब खुद बहनजी ने भी यह स्वीकार कर लिया है कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) एक बड़ी सियासी ताकत के रूप में उभर चुकी है।

बसपा प्रमुख के प्रति अपनी भावनाएं स्पष्ट करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि बहनजी के प्रति उनके मन में हमेशा से गहरा सम्मान रहा है और आगे भी बना रहेगा। इसी आदर के साथ वह उनसे कहना चाहते हैं कि नगीना की जागरूक जनता ने साल 2024 के आम लोकसभा चुनाव में उन्हें भारी-भरकम 5,12,552 वोट देकर अपना सांसद और जनप्रतिनिधि चुना है। उनके लिए यह केवल एक चुनावी मुकाबला जीतने जैसा नहीं है, बल्कि नगीना की महान जनता के अपार भरोसे, स्नेह और एक बड़ी जिम्मेदारी का प्रतीक है। वह इस अपूर्व जनादेश के लिए नगीना के हर एक मतदाता के हमेशा ऋणी रहेंगे।

​चुनावी प्रक्रिया और ईवीएम की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए उन्होंने आगे लिखा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव प्रक्रिया और ईवीएम की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करना हर नागरिक और नेता का बुनियादी अधिकार है। वह खुद भी चुनाव प्रणाली में अधिक से अधिक पारदर्शिता लाने और बैलेट पेपर (मतपत्र) से चुनाव कराने की मांग लंबे समय से उठाते रहे हैं। हालांकि, नगीना की जनता ने जिस अथाह प्रेम और अटूट विश्वास के साथ उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना है, उस जनादेश को किसी भी तरह के राजनीतिक षड्यंत्र या मिलीभगत से जोड़ना उन लाखों मतदाताओं की भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचाता है, जिन्होंने पूरी ईमानदारी और अपने विवेक के साथ अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था।

अपनी राजनीतिक विचारधारा को स्पष्ट करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि उनकी राजनीति का आधार किसी भी व्यक्ति विशेष का विरोध करना बिल्कुल नहीं है, बल्कि बहुजन समाज के आत्मसम्मान, सामाजिक न्याय और देश के संविधान की रक्षा के लिए किया जाने वाला निरंतर संघर्ष है। वैचारिक मतभेद होना राजनीति में स्वाभाविक है, लेकिन इसके बावजूद बहुजन समाज के विभिन्न धड़ों और नेताओं के बीच आपसी संवाद, आदर और भाईचारा हमेशा कायम रहना चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि बहनजी के प्रति उनका सम्मान अतीत में भी था, वर्तमान में भी पूरी तरह बरकरार है और भविष्य में भी हमेशा बना रहेगा। साथ ही, उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें हमेशा उनके आशीर्वाद की प्रतीक्षा रहेगी।

अपने बयान के अंत में चंद्रशेखर आजाद ने एक तथ्यात्मक सुधार की ओर इशारा करते हुए लिखा कि बस वह अंत में इतना स्पष्ट करना चाहते हैं कि बहनजी, आपके ही आशीर्वाद से हमारी पार्टी का आधिकारिक और असली नाम ‘आजाद समाज पार्टी (कांशीराम)’ है, न कि ‘आजाद समाजवादी पार्टी’।