नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में गुरुवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त वैचारिक युद्ध देखने को मिला। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सदन के नेता जेपी नड्डा ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे को संबोधित करते हुए कहा कि वे एक अनुभवी नेता हैं, उन्हें अपनी पार्टी को किसी ‘अबोध बालक’ का बंधक नहीं बनने देना चाहिए।
’अबोध और अहंकार का जोड़ घातक’ – नड्डा
जेपी नड्डा ने विपक्षी दलों के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहा है। उन्होंने खरगे से कहा, “आप तजुर्बेकार हैं, अपनी पार्टी को स्वतंत्र रूप से चलाइए। अबोध बालक और अहंकार का जोड़ बहुत घातक होता है, इससे बचना चाहिए।” नड्डा ने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा में पीएम के जवाब के दौरान विपक्ष ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन नहीं किया।
खरगे का पलटवार: ‘आप तो बंधुआ मजदूर हैं’
नड्डा की टिप्पणी पर विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने तीखा पलटवार करते हुए कहा, “हमारी पार्टी की चिंता छोड़िए, आपकी पार्टी को तो मोदी जी ने बंधक बना लिया है। आप बिना उनकी राय के एक शब्द नहीं बोल सकते।” खरगे ने सत्ता पक्ष के लिए ‘बंधुआ मजदूर’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया, जिस पर सभापति ने आपत्ति जताई और इन शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया।
लोकसभा का मुद्दा राज्यसभा में क्यों?
जब सत्ता पक्ष ने लोकसभा के मुद्दों को राज्यसभा में उठाने पर आपत्ति जताई, तो खरगे ने दो टूक कहा कि लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर ही संसद बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि विपक्ष के नेता को लोकसभा में बोलने नहीं दिया जाएगा, तो यह मुद्दा हर सदन में गूंजेगा। इस दौरान सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने दोनों पक्षों को शांत रहने और संसदीय मर्यादा बनाए रखने की अपील की।

