दो स्टूलों को मिलाने से कुर्सी नहीं बनती…अखिलेश यादव के तंज पर केशव मौर्य का तीखा पलटवार, बोले- हमारी जोड़ी से घबराहट जायज है

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘कुर्सी’ की जंग अब ‘स्टूल’ और ‘जोड़ियों’ के जुबानी युद्ध तक पहुँच गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सूबे के दोनों डिप्टी सीएम, केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक की एकजुटता पर चुटकी ली, जिस पर अब केशव प्रसाद मौर्य ने करारा पलटवार किया है। अखिलेश यादव के “दो स्टूलों को मिलाने से कुर्सी नहीं बनती” वाले बयान पर डिप्टी सीएम ने उन्हें भविष्य के ‘हिसाब-किताब’ की चेतावनी दे डाली है।

​क्या था अखिलेश यादव का तंज?

दरअसल, बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कुशीनगर से एक वीडियो सामने आया था, जिसमें डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक एक पार्क में साथ टहलते हुए भगवान बुद्ध के सिद्धांतों पर चर्चा कर रहे थे। इस वीडियो को साझा करते हुए अखिलेश यादव ने एक्स (X) पर कटाक्ष किया था कि दो स्टूलों को एक साथ रखने भर से वह मुख्यमंत्री की ‘कुर्सी’ का विकल्प नहीं बन सकते।

केशव मौर्य का करारा जवाब

सपा प्रमुख के इस हमले पर पलटवार करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने लिखा कि एक “फिट और हिट जोड़ी” को साथ देखकर अखिलेश यादव की घबराहट पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा कि आज जनता के बीच उनकी और बृजेश पाठक की जोड़ी भरोसे का प्रतीक बन चुकी है। मौर्य ने अखिलेश को नसीहत देते हुए कहा कि उनकी यह जानकारी प्रदेश के राजनीतिक भविष्य के लिए अच्छी है।

इतिहास और विरासत का हवाला

अपनी पोस्ट में डिप्टी सीएम ने पिछड़ों और वंचितों की राजनीति को भी हवा दी। उन्होंने कहा, “मैं चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के वंश का प्रतिनिधि हूँ और भगवान बुद्ध की करुणा व न्याय की विरासत से जुड़ा हूँ।” उन्होंने अखिलेश यादव पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि सपा के संरक्षण में शाक्य, कुशवाहा, मौर्य, सैनी और अन्य कमजोर वर्गों पर जो अत्याचार हुए हैं, उन्हें प्रदेश कभी नहीं भूलेगा।

2047 का संकल्प और ‘कमल’ का दावा

केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि इन तमाम अन्यायों का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से ‘कमल’ खिलाकर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार 2047 तक विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में जनता हर अन्याय का पूरा हिसाब करेगी। इस जुबानी जंग ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि यूपी में सत्ता और विपक्ष के बीच कड़वाहट कम होने के बजाय और गहरी होती जा रही है।