यूपी के ब्लड सेंटरों में बड़ी धांधली उजागर: FSDA ने प्रदेशभर में 54 केंद्रों को खंगाला, आगरा के नामी चैरिटेबल सेंटर्स की गतिविधियां ठप

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आगरा/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले ब्लड सेंटरों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। प्रदेशभर में चलाए गए एक व्यापक निरीक्षण अभियान के दौरान 54 रक्त केंद्रों की गहन जांच की गई, जिसमें मानकों के उल्लंघन और टेस्टिंग में भारी लापरवाही उजागर हुई है। विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए 10 ब्लड सेंटरों में रक्त संचालन गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।

​आगरा बना लापरवाही का ‘एपिसेंटर’: 5 बड़े केंद्रों पर गिरी गाज

​चौंकाने वाली बात यह है कि जिन 10 केंद्रों का संचालन बंद कराया गया है, उनमें से आधे यानी 5 ब्लड सेंटर अकेले आगरा जिले के हैं। ताजनगरी के इन केंद्रों में स्टोरेज से लेकर टेस्टिंग प्रोटोकॉल तक में गंभीर खामियां पाई गईं, जो सीधे तौर पर मरीजों के जीवन के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती थीं।

आगरा के ये 5 केंद्र हुए सील/बंद:

​आगरा चैरिटेबल ब्लड सेंटर
​जय हिंद चैरिटेबल ब्लड सेंटर
​लाइफ लाइन चैरिटेबल ब्लड सेंटर
​श्री बालाजी चैरिटेबल ब्लड सेंटर
​श्री जगदंबा चैरिटेबल ब्लड सेंटर

जांच में क्या मिलीं खामियां?

एफएसडीए की टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि इन केंद्रों में:

​ब्लड स्टोरेज सिस्टम: रक्त के भंडारण के लिए निर्धारित तापमान और फ्रीजिंग मानकों का पालन नहीं हो रहा था।

टेस्टिंग प्रोटोकॉल: रक्त के नमूनों की स्क्रीनिंग और संक्रमण मुक्त होने की जांच में गंभीर लापरवाही बरती जा रही थी।

​रिकॉर्ड मेंटेनेंस: डोनर और रिसीवर के डेटा और तकनीकी लॉग बुक में भारी अनियमितताएं मिलीं।

सुरक्षा मानक: केंद्र के संचालन के लिए आवश्यक अनिवार्य चिकित्सा उपकरणों और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी थी।

लाइसेंस निरस्तीकरण की तैयारी

विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिन केंद्रों पर रोक लगाई गई है, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यदि उनके जवाब संतोषजनक नहीं मिले या तय समय सीमा में सुधार नहीं किया गया, तो उनके लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त किए जा सकते हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में ‘कागजी खानापूर्ति’ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित या असुरक्षित रक्त चढ़ाने से हेपेटाइटिस, एचआईवी और अन्य जानलेवा बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। एफएसडीए की इस कार्रवाई ने निजी और चैरिटेबल संस्थाओं को कड़ा संदेश दिया है कि नियमों की अनदेखी करने पर विभाग ताला लगाने में संकोच नहीं करेगा।