एक्सप्रेसवे पर रफ्तार नहीं, सुरक्षित सफर की जरूरत; केवल अपील से नहीं, कठोर नीति से बचेंगी जानें

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केसी जैन एडवोकेट
केसी जैन एडवोकेट

आगरा/मथुरा। मंगलवार को तड़के सवा चार बजे यमुना एक्सप्रेसवे पर हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर देर रात और तड़के के समय इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर हादसे अधिक क्यों होते हैं। यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक लगातार उभरती प्रवृत्ति है, जो सख्त नीति और ठोस निर्णय की मांग कर रही है।

समय: सबसे बड़ा जोखिम कारक

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार रात एक बजे से सुबह 5 बजे के बीच मानव शरीर की जैविक घड़ी गहरी नींद की अवस्था में होती है। इसी दौरान थकान चरम पर होती है और प्रतिक्रिया क्षमता न्यूनतम स्तर पर। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस समय वाहन चलाना शरीर की प्राकृतिक लय के विपरीत है, जिससे झपकी और ध्यान भंग की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

रफ्तार: कुछ सेकंड की चूकसैकड़ों मीटर का खतरा

यमुना एक्सप्रेसवे पर चार पहिया वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। इतनी गति पर यदि चालक की आंख 3 से 4 सेकंड के लिए भी बंद हो जाए तो वाहन 80 से 100 मीटर तक बिना नियंत्रण के आगे बढ़ सकता है। यह दूरी किसी भी वाहन, डिवाइडर या अवरोध से टकराने के लिए पर्याप्त है।

कम ट्रैफिकज्यादा जोखिम

तड़के के समय सड़क लगभग खाली रहती है। यही खालीपन चालक को तेज रफ्तार के लिए प्रेरित करता है। लेकिन यह वही समय होता है जब शरीर सबसे अधिक थका हुआ होता है। कम ट्रैफिक और अधिक स्पीड का यह संयोजन हादसों को जन्म देता है।

लंबी दूरी और बिना विश्राम ड्राइविंग

बस और ट्रक चालक कई-कई घंटे लगातार वाहन चलाते हैं। पर्याप्त विश्राम न मिलने से थकान जमा होती जाती है और अंततः माइक्रो-नींद का कारण बनती है। कई मामलों में चालक स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि दुर्घटना से पहले उन्हें नींद आ रही थी।

समाधान: केवल अपील नहींकठोर नीति जरूरी

रात्रिकालीन प्रतिबंध- रात 1 बजे से सुबह 4 बजे तक भारी वाणिज्यिक वाहनों और लंबी दूरी की बसों की आवाजाही सीमित की जाए। इस अवधि को अनिवार्य विश्राम समय घोषित किया जा सकता है।

रफ्तार पर लगाम- निजी चार पहिया वाहनों के लिए अधिकतम 80 किमी/घंटा। बसों और भारी वाहनों के लिए अधिकतम 60 किमी/घंटा। स्वचालित कैमरों से त्वरित चालान और कड़ी निगरानी।

पूरे एक्सप्रेसवे को आधुनिक कैमरों और एकीकृत कंट्रोल रूम से जोड़ा जाए। यदि कोई वाहन अनियमित गति से चले या अचानक रुक जाए, तो तुरंत अलर्ट जारी हो और सहायता दल मौके पर पहुँचे।

अनिवार्य विश्राम नियम- लंबी दूरी के चालकों के लिए अधिकतम ड्राइविंग घंटे तय हों। टोल प्लाजा पर डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से उनके ड्राइविंग समय की निगरानी की जाए।

जागरूकता और सख्ती- टोल और विश्राम स्थलों पर डिजिटल बोर्ड लगाए जाएं। जैसे- नींद में वाहन न चलाएं। थके हैं तो रुकें  और जीवन सबसे कीमती है आदि।

मानवीय पहलू: आंकड़ों के पीछे बिखरते परिवार

हर हादसा केवल संख्या नहीं होता। वह किसी का पिता, मां, बेटा या बेटी होता है। एक क्षण की झपकी कई परिवारों को जीवन भर का दर्द दे जाती है।

यदि सच में सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, तो समय, गति और थकान, इन तीनों पर एक साथ काम करना होगा। यमुना एक्सप्रेसवे देश के सबसे तेज मार्गों में से एक है, लेकिन इसकी सुरक्षा सरकार, प्रशासन और समाज, सभी की साझा जिम्मेदारी है।

अब वक्त आ गया है कि केवल चेतावनी नहीं, बल्कि कठोर और तत्काल निर्णय लिए जाएं, ताकि तड़के की ये त्रासदियां इतिहास बनें, हकीकत नहीं।

(लेखक वरिष्ठ अधिवक्ता और सड़क सुरक्षा एक्टिविस्ट हैं)