वेस्ट यूपी में ‘योगी-जयंत’ की जुगलबंदी: मुजफ्फरनगर से लिखी जाएगी नई सियासी पटकथा, जाट-गुर्जर समीकरण साधने की तैयारी

Politics

​मुजफ्फरनगर/मेरठ: पश्चिम उत्तर प्रदेश की तपती राजनीति में अब ‘सियासी लू’ चलने लगी है। आगामी 13 अप्रैल को मुजफ्फरनगर की धरती एक बड़े राजनीतिक बदलाव की गवाह बनने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष जयंत चौधरी एक साथ मंच साझा कर न केवल गठबंधन की ताकत दिखाएंगे, बल्कि जाट और गुर्जर मतों को एक पाले में लाने के लिए नई पटकथा भी लिखेंगे।

​जाट राजनीति में हलचल और बाहरी दखल

​हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राजस्थान के सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणियों ने भाजपा की जाट राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। इन बयानों के बाद भाजपा और गठबंधन के भीतर से तीखे विरोध के स्वर उठे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन स्वर में जयंत चौधरी की आवाज भी शामिल है, जो गठबंधन की मजबूती का संकेत दे रही है। वहीं, दूसरी ओर दोराहे पर खड़ी गुर्जर राजनीति फिलहाल अपना नया ‘चौधरी’ तलाशने में जुटी है।

​विरासत की सियासत: 29 मार्च का वो घटनाक्रम

​बीती 29 मार्च को पश्चिमी यूपी में दो बड़ी घटनाएं हुईं जिसने सियासी तापमान बढ़ा दिया। नोएडा के दादरी में गुर्जर समाज का भारी जमावड़ा हुआ, तो दूसरी तरफ मेरठ के सकौती में जाट राजा सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण किया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने राजा सूरजमल की प्रतिमा लगवाने में पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन भगवंत मान और हनुमान बेनीवाल के बयानों के कारण वह अपनी ही पार्टी के जाट नेताओं के निशाने पर आ गए।

​गुर्जरों का मलाल और अखिलेश की चाल

​भाजपा के लिए गुर्जरों की नाराजगी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उपेक्षा का आरोप लगाते हुए गुर्जर समाज ने भाजपा को चेतावनी दी है कि यदि उनकी अनदेखी हुई तो 2027 में वे नई राह चुन सकते हैं। इसी नाराजगी को भांपते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दादरी की रैली में बड़ा दांव खेला। उन्होंने लखनऊ में तीन गुर्जर महानायकों मिहिर भोज, कोतवाल धन सिंह गुर्जर और विजय सिंह पथिक की प्रतिमाएं लगवाने का ऐलान कर गुर्जरों को अपनी ओर खींचने की कोशिश की है।

​13 अप्रैल: मुजफ्फरनगर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश

​चुनावी वर्ष में जाट नेताओं की बढ़ती बेचैनी और गुर्जरों के मलाल को दूर करने के लिए भाजपा अब ‘डैमेज कंट्रोल’ मोड में है। 13 अप्रैल को योगी और जयंत की मुजफ्फरनगर रैली इसी कड़ी का हिस्सा है। पार्टी गुर्जर जनप्रतिनिधियों से संवाद कर रही है ताकि समाज की शिकायतों को दूर किया जा सके।

राजनीतिक समीकरण: 2014 और 2017 में जाट-गुर्जर भाजपा के साथ थे, लेकिन 2019 और 2022 में जाटों का झुकाव रालोद की तरफ दिखा। अब 2024 के लिए जयंत चौधरी से हाथ मिलाकर भाजपा ने जाटों का तनाव तो कम कर लिया है, लेकिन गुर्जरों को साधे रखना अब भी एक बड़ी चुनौती है।