नई दिल्ली/बेंगलुरु: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में इजरायल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध का सीधा असर अब भारतीय रसोई और सेवाओं पर दिखने लगा है। कच्चे तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने के कारण भारत के कई राज्यों में एलपीजी (LPG) की भारी किल्लत शुरू हो गई है। इसका सबसे बड़ा असर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु और महाराष्ट्र के पुणे में देखने को मिल रहा है।
बेंगलुरु: कल से बंद हो सकते हैं रेस्टोरेंट और होटल
बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन ने एक चिंताजनक बयान जारी करते हुए कहा है कि कमर्शियल कुकिंग गैस की भारी कमी के कारण वे कल से अपने होटल और रेस्टोरेंट चलाने की स्थिति में नहीं हैं। एसोसिएशन के मुताबिक, युद्ध के कारण सप्लाई लगभग ठप है, जिससे कमर्शियल सिलेंडरों की उपलब्धता न के बराबर रह गई है। अगर स्थिति नहीं सुधरी तो शहर के हजारों आउटलेट्स पर ताला लग सकता है।
पुणे: श्मशान घाटों पर गैस से दाह संस्कार बंद
किल्लत का असर इस कदर गहराया है कि पुणे नगर निगम (PMC) ने शहर के सभी श्मशान घाटों पर गैस के जरिए होने वाले दाह संस्कार पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। निगम अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देशों और सप्लाई में आई भारी कमी को देखते हुए यह कड़ा फैसला लेना पड़ा है।
केंद्र सरकार का एक्शन: बुकिंग के नियमों में बदलाव
देश में गैस की जमाखोरी (Hoarding) और ‘पैनिक बुकिंग’ को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सोमवार को बड़ा कदम उठाया है। अब एलपीजी सिलेंडर की दोबारा बुकिंग के लिए 21 दिन की जगह 25 दिन का अनिवार्य अंतराल कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि युद्ध की अनिश्चितता के बीच मांग में अचानक 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है, जिसे नियंत्रित करने के लिए यह समय सीमा बढ़ाई गई है।
पेट्रोल-डीजल के दाम और स्टॉक की स्थिति
सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और यह उपाय केवल प्रभावी प्रबंधन के लिए किए गए हैं। राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार होने के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां फिलहाल मौजूदा घाटे को खुद वहन करेंगी।

