आगरा। कोडीनयुक्त कफ सिरप के गैर-कानूनी कारोबार और सप्लाई नेटवर्क के खिलाफ एसटीएफ (STF) की चल रही सघन कार्रवाई के तार अब आगरा के दवा बाजार से भी जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। सहारनपुर के बड़े दवा कारोबारी भूपेंद्र सिंह चौहान से की गई गहन पूछताछ में आगरा के दवा व्यापारी देवेंद्र आहूजा उर्फ चिंटू का नाम प्रमुखता से उजागर होने की खबर है। एसटीएफ अब उसके पुराने व्यापारिक ताल्लुकात, कफ सिरप की खरीद-बिक्री के लेन-देन और पूरे सप्लाई नेटवर्क से जुड़े दस्तावेजों की गहराई से तफ्तीश कर रही है।
देवेंद्र आहूजा का नाम फव्वारा स्थित जय राम जी की मेडिकल एजेंसी से जुड़ा रहा है। जांच में उसके जरिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये के कफ सिरप की बिना बिलिंग खरीद-फरोख्त किए जाने के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ कारोबारी को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुला सकती है। हालांकि, अभी इस मामले में उसकी वर्तमान भूमिका और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
2022 में मालदा पुलिस ने आगरा से किया था गिरफ्तार
देवेंद्र आहूजा उर्फ चिंटू का नाम पहली बार नवंबर 2022 में कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री के मामले में प्रमुखता से सामने आया था। उस समय पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक थाना क्षेत्र में पुलिस ने नशे के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कफ सिरप की बड़ी खेप पकड़ी थी। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में आगरा के फव्वारा स्थित जय राम जी की मेडिकल एजेंसी के संचालक देवेंद्र आहूजा का नाम सामने आया था।
इसके बाद पश्चिम बंगाल की एसओजी ने आगरा पहुंचकर स्थानीय पुलिस की मदद से मेडिकल एजेंसी पर छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान देवेंद्र आहूजा को गिरफ्तार किया गया था। टीम ने उसके मोबाइल फोन जब्त किए थे और एजेंसी में काम करने वाले कर्मचारियों के मोबाइल नंबरों और संपर्कों की भी जानकारी जुटाई थी। उस समय पुलिस की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि आगरा से खरीदा गया कफ सिरप पश्चिम बंगाल और सीमावर्ती इलाकों तक कैसे पहुंच रहा था। नवंबर 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय जांच में कफ सिरप की कथित कालाबाजारी और बांग्लादेश तक सप्लाई के आरोप भी सामने आए थे।
110 रुपये की शीशी 940 रुपये तक बेचने का आरोप
वर्ष 2022 में सामने आए मामले की जांच के दौरान कफ सिरप की कीमतों में भारी अंतर की बात भी सामने आई थी। उस समय प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, 110 रुपये कीमत वाली कफ सिरप की शीशी को कथित तौर पर 940 रुपये तक में बेचे जाने की जानकारी सामने आई थी। जांच में यह आशंका जताई गई थी कि कोडीनयुक्त सिरप को सामान्य दवा की तरह नहीं, बल्कि नशे के लिए इस्तेमाल करने वाले लोगों और गिरोहों तक पहुंचाया जा रहा था।
भूपेंद्र चौहान से पूछताछ में खुल रही नेटवर्क की कड़ियां
वर्तमान में एसटीएफ कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार के मामले में सहारनपुर के दवा कारोबारी भूपेंद्र सिंह चौहान से पूछताछ कर रही है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भूपेंद्र को 48 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई और उससे करीब 70 सवाल किए गए। जांच एजेंसी का जोर इस नेटवर्क में शामिल कारोबारियों, फर्मों, स्टॉकिस्टों और सप्लाई चेन की पहचान करने पर है।
पूछताछ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फैले नेटवर्क की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। इनमें मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़, बुलंदशहर और शामली जैसे जिले शामिल हैं। एसटीएफ यह पता लगा रही है कि कफ सिरप किन कंपनियों से खरीदा गया, किन फर्मों के माध्यम से उसकी बिलिंग दिखाई गई और वास्तविक रूप से उसकी आपूर्ति कहां की गई।
नौकरों के नाम पर फर्में बनाकर कारोबार की आशंका
एसटीएफ की जांच में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ फर्मों का पंजीकरण कर्मचारियों और नौकरों के नाम पर कराकर उनके माध्यम से कोडीनयुक्त कफ सिरप की खरीद-बिक्री दिखाए जाने की आशंका है। जांच एजेंसी इन फर्मों के लाइसेंस, बिलिंग रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और बैंक खातों का मिलान कर रही है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि जिन फर्मों के नाम पर दवाओं की खरीद दिखाई गई, क्या वास्तव में उतनी मात्रा में माल संबंधित मेडिकल स्टोर या स्टॉकिस्ट तक पहुंचा था। इसके अलावा भुगतान किसके खाते से हुआ और रकम किन लोगों तक पहुंची, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
अब आगरा के कारोबारी संपर्कों की होगी जांच
भूपेंद्र सिंह चौहान से पूछताछ में देवेंद्र आहूजा उर्फ चिंटू का नाम सामने आने के बाद आगरा की पुरानी कड़ी एक बार फिर जांच के दायरे में आ गई है। एसटीएफ यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि वर्ष 2022 में सामने आए मामले और मौजूदा कफ सिरप सिंडिकेट के बीच कोई कारोबारी संबंध रहा है या नहीं। इसके लिए पुराने खरीद-बिक्री के दस्तावेज, फर्मों का रिकॉर्ड, भुगतान का ब्योरा और संबंधित लोगों के संपर्कों का मिलान महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल किसी कारोबारी का नाम पूछताछ में सामने आना अपने आप में उसकी संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। एसटीएफ की जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि देवेंद्र आहूजा की कथित भूमिका क्या रही है और कफ सिरप की अवैध सप्लाई में आगरा से जुड़े कितने लोग शामिल थे।
