भारत का ‘आयरन मैन’ अवतार: 77वें गणतंत्र दिवस पर रोबोटिक डॉग ‘निग्रहा’ और ‘स्वार्म ड्रोन’ ने दुनिया को चौंकाया

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नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस पर इस बार कर्तव्य पथ सिर्फ पारंपरिक सैन्य शक्ति का मंच नहीं रहा, बल्कि यह भारत की भविष्य की रक्षा तकनीक का बड़ा प्रदर्शन भी बन गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में आयोजित परेड में पहली बार भारतीय सेना ने रोबोटिक डॉग्स, AI आधारित स्वायत्त वाहन और स्वार्म ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसी एडवांस क्षमताओं की झलक दिखाई।

परेड का यह हिस्सा साफ संकेत देता दिखा कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में केवल हथियारों की ताकत नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और आत्मनिर्भरता के दम पर भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है।

पहली बार दिखे रोबोटिक डॉग्स और अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल्स

गणतंत्र दिवस परेड में इस बार पहली बार रोबोटिक डॉग्स और अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल्स (UGV) को शामिल किया गया। सेना ने निग्रहा, भैरव, भुवीरक्षा और कृष्णा जैसे एडवांस सिस्टम पेश किए, जिन्हें खासतौर पर दुर्गम इलाकों में बिना इंसानी मदद के ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है।

रोबोटिक डॉग्स के दस्ते ने यह भी दिखाया कि आने वाले समय में सुरक्षा, गश्त और निगरानी जैसी जिम्मेदारियों में एआई आधारित सेंसर और ऑटोमेशन बड़ी भूमिका निभाने जा रहे हैं।

‘ड्रोन शक्ति’ ने खींचा ध्यान, स्वार्म ड्रोन की ताकत दिखाई

परेड में भारतीय वायुसेना के विमानों के साथ-साथ ड्रोन टेक्नोलॉजी का भी प्रभावी प्रदर्शन हुआ। ‘ड्रोन शक्ति’ के जरिए शक्तिबाण और दिव्यास्त्र जैसे सिस्टम सामने आए, जिनके जरिए भारत ने स्वार्म ड्रोन क्षमता का संदेश दिया।

स्वार्म ड्रोन तकनीक ऐसी एआई प्रणाली पर आधारित होती है, जिसमें दर्जनों ड्रोन एक साथ मिलकर निगरानी और सटीक कार्रवाई कर सकते हैं। इसके अलावा जोल्ट और टैक्टिकल हाइब्रिड यूएवी जैसे प्लेटफॉर्म ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय सेना अब हवा में लंबे समय तक रहकर दुश्मन की गतिविधियों को ट्रैक करने और जरूरत पड़ने पर जवाब देने में सक्षम है।

‘हिम योद्धा’ दस्ते में डिजिटल सुरक्षा कवच

इस बार परेड में हिम योद्धा दस्ते की प्रस्तुति भी चर्चा में रही। इस दस्ते में भारतीय नस्ल के कुत्तों को आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस कर उतारा गया। ये कुत्ते बुलेट-रेसिस्टेंट जैकेट पहने दिखे, जिनमें हाई-डेफिनिशन कैमरा, जीपीएस और वायरलेस रेडियो सिस्टम लगे थे।

इस सिस्टम के जरिए लाइव फीड सीधे कमांड सेंटर तक पहुंचाई जा सकती है, जिससे घुसपैठ रोधी अभियान और बॉर्डर सर्विलांस में तेजी और सटीकता बढ़ने की उम्मीद है।

नौसेना की झांकी में सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का संदेश

परेड में नौसेना की झांकी में GSAT-7R (प्रोजेक्ट रोहिणी) उपग्रह को भी प्रदर्शित किया गया। यह सैटेलाइट समुद्री सीमाओं पर सुरक्षित टेलीकॉम नेटवर्क और डेटा फ्लो उपलब्ध कराने में मदद करता है।

वहीं, केरल की झांकी में 100% डिजिटल साक्षरता का संदेश भी दिखाया गया, जिससे यह संकेत मिला कि टेक्नोलॉजी का विस्तार अब केवल शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि हर वर्ग तक पहुंच रहा है।

रक्षा क्षेत्र में ‘भविष्य की तैयारी’ का संदेश

इस बार कर्तव्य पथ पर जो दृश्य देखने को मिला, वह साफ बताता है कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में रोबोटिक्स, एआई, ड्रोन और डिजिटल कम्युनिकेशन के जरिए भविष्य की जरूरतों के लिए खुद को तैयार कर रहा है। परेड में दिखी यह झलक सिर्फ तकनीक का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल इंडिया के विजन का भी मजबूत संदेश रही।