साइबर हमलों के बाद जगीं भारतीय कंपनियां: 64% संगठनों ने डेटा सुरक्षा पर बढ़ाया निवेश, सिनोलॉजी सर्वे में बड़ा खुलासा

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मुंबई। वर्तमान डिजिटल युग में डेटा किसी भी व्यावसायिक संस्थान या कॉरपोरेट घराने की सबसे मूल्यवान पूंजी बन चुका है। हालांकि, तेजी से बढ़ते और जटिल होते साइबर हमलों का खतरा कंपनियों की सुरक्षा रणनीतियों की कठोर परीक्षा ले रहा है। डेटा प्रबंधन व सुरक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सिनोलॉजी के ‘2026 एंटरप्राइज सर्वे’ ने भारतीय कॉरपोरेट जगत की सुरक्षा तैयारियों की एक बेहद दिलचस्प और विरोधाभासी तस्वीर सामने रखी है।

सर्वे के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत के 64 प्रतिशत संगठनों ने किसी साइबर सुरक्षा घटना का शिकार होने के बाद डेटा सुरक्षा से जुड़े नए और उन्नत समाधान खरीदे हैं। सुरक्षा खरीद का यह आंकड़ा ऑस्ट्रेलिया के 49 फीसदी और मध्य पूर्व व अफ्रीका (MEA) के 48 फीसदी की तुलना में काफी अधिक है।

​अंतरराष्ट्रीय शोध संस्था ‘फाउंड्री’ (Foundry) द्वारा आयोजित इस व्यापक अध्ययन में 308 प्रमुख आईटी निर्णयकर्ताओं (IT Decision Makers) को शामिल किया गया।

​99 फीसदी को अपनी क्षमता पर भरोसा, लेकिन धरातल पर तैयारी अधूरी

सर्वे का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि 99 फीसदी भारतीय उत्तरदाताओं (आईटी प्रमुखों) ने अपने-अपने संगठनों की साइबर संकट से निपटने और डेटा को सुरक्षित बहाल करने की क्षमता पर पूरा भरोसा जताया है। हालांकि, सिनोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार यह अति-विश्वास जमीनी हकीकत से थोड़ा परे दिखाई देता है।

​कंपनियों में अनियमित रूप से लिया जाने वाला डेटा बैकअप, आपदा प्रबंधन (Disaster Recovery) की अधूरी या न के बराबर जांच और अलग-अलग व असंगत सुरक्षा टूल्स पर अत्यधिक निर्भरता इस 99 फीसदी वाले भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

​साइबर घटना के बाद चेत रहे भारतीय संगठन

​रिपोर्ट से यह साफ जाहिर होता है कि अधिकांश भारतीय कंपनियां पूर्वाग्रह या अग्रिम सुरक्षा उपाय (Proactive Approach) अपनाने के बजाय साइबर हमला झेलने के बाद (Reactive Approach) सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए जागे हैं। साइबर अपराधियों के लगातार बदलते पैंतरों के बीच सिनोलॉजी सर्वे ने भारतीय कंपनियों को केवल उपकरणों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी बैकअप साइकिल नियमित करने और रिकवरी टेस्टिंग को अनिवार्य बनाने की सख्त जरूरत पर बल दिया है।

-अनिल बेदाग