भारत को खोखले शब्दों की नहीं, बल्कि एक मजबूत उत्पादन आधार की आवश्यकता: राहुल गांधी

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नई दिल्ली। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक ​बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से कटाक्ष किया है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि भारत में प्रतिभा तो है, लेकिन युवाओं को रोजगार देने के लिए नई प्रौद्योगिकी में औद्योगिक कौशल विकसित करने के लिए उसे खोखले शब्दों की नहीं, बल्कि मजबूत उत्पादन आधार की जरूरत है।

राहुल गांधी ने शनिवार को एक्स पर एक पोस्ट में इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे चीन ने ड्रोन का उत्पादन शुरू कर दिया है? जो दुनिया भर में युद्ध में क्रांति ला रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी बनने के लिए रणनीति विकसित करने की जरूरत है।

राहुल गांधी ने कहा कि ड्रोन ने युद्ध में क्रांति ला दी है, बैटरी, मोटर और ऑप्टिक्स को मिलाकर अभूतपूर्व तरीके से युद्ध के मैदान में युद्धाभ्यास और संचार किया है। लेकिन ड्रोन सिर्फ़ एक तकनीक नहीं है, वे एक मजबूत औद्योगिक प्रणाली द्वारा उत्पादित नीचे से ऊपर तक के नवाचार हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए पोस्ट में कहा कि दुर्भाग्य से पीएम मोदी इसे समझने में विफल रहे हैं। जबकि वह एआई पर ‘टेलीप्रॉम्प्टर’ भाषण देते हैं, हमारे प्रतिस्पर्धी नई तकनीकों में महारत हासिल कर रहे हैं। भारत को खोखले शब्दों की नहीं, बल्कि एक मजबूत उत्पादन आधार की आवश्यकता है।

इन तीन मुख्य मार्ग से भारत आए ड्रोन

लाहौर से अमृतसर, नरोवाल से फिरोजपुर और बहावलनगर से श्रीगंगानगर- पिछले तीन सालों में ये तीन मुख्य मार्ग के जरिए पाकिस्तान से भारत के सीमावर्ती इलाकों में ड्रग्स और हथियार पहुंचाने वाले ड्रोन सबसे ज़्यादा संख्या में आए हैं। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने दिल्ली और पंजाब में अपने ड्रोन फ़ोरेंसिक लैब में लगभग 500 ड्रोन के उड़ान पथों का विश्लेषण करने के बाद यह बात का खुलाया किया है।

The Drone Age of War | Rahul Gandhi

ड्रोन ने युद्ध लड़ने के तरीक़े को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। बैटरी, मोटर और ऑप्टिक्स के संयोजन से युद्ध के मैदान में घात-प्रतिघात और संचार में अभूतपूर्व बदवाल आया है। लेकिन ड्रोन सिर्फ़ एक टेक्नोलॉजी भर नहीं हैं – वे एक मज़बूत इंडस्ट्रियल सिस्टम द्वारा ज़मीनी और छोटे-छोटे स्तर पर उत्पादन होने वाले नवाचार हैं।

ड्रोन्स ने टैंक, तोप और यहां तक कि एयरक्राफ्ट कैरियर के महत्व को भी कम कर दिया है। एयर पावर को प्लाटून लेवल तक ला दिया है और युद्धक्षेत्र में खुफिया तंत्र एवं सटीकता को नया रूप दिया है। लेकिन यह क्रांति सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं है—यह उद्योग, AI और अगली पीढ़ी की तकनीक की भी बात है।

दुर्भाग्य से, प्रधानमंत्री मोदी इसे समझने में असफल रहे हैं। ऐसे समय में जब वह AI पर सिर्फ़ ‘टेलीप्रॉम्प्टर’ से पढ़कर भाषण देने में लगे हैं, हमारे कंपीटीटर्स नई टेक्नोलॉजी में महारत हासिल कर रहे हैं। भारत को खोखले भाषणों की नहीं बल्कि मजबूत उत्पादन बेस की ज़रूरत है। असली शक्ति सिर्फ ड्रोन बनाने में नहीं, बल्कि उनके पीछे की इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी, ऑप्टिक्स और उत्पादन तंत्र को नियंत्रित करने में है, लेकिन भारत इस क्षेत्र में नहीं बढ़ रहा है।

हम AI या तकनीक में नेतृत्व नहीं कर सकते अगर हमारा उत्पादन पर नियंत्रण नहीं है। हमने अपनी उपभोक्ता डेटा सौंप दी है, हम मुख्य कंपोनेंट्स नहीं बनाते हैं और जब बाकी दुनिया भविष्य गढ़ रही है तब हम सिर्फ असेंबल करने तक ही सीमित हैं।

भारत के पास अद्भुत प्रतिभा, विशाल क्षमता और जबरदस्त इच्छाशक्ति है। लेकिन खोखली बातों से कुछ नहीं होगा—हमें स्पष्ट दृष्टि और असली औद्योगिक ताकत चाहिए। भविष्य ऊपर से नहीं बनेगा, यह जमीनी स्तर से उभरेगा। अब वक्त है कि भारतीय युवा कदम बढ़ाएं और सुनिश्चित करें कि भारत पीछे न छूटे।

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लाहौर से भारत भेजे 184 ड्रोन

इन मानवरहित हवाई वाहनों की फोरेंसिक जांच से पता चला है कि सबसे अधिक 184 ड्रोन लाहौर से शुरू हुए और अमृतसर सीमा क्षेत्र में उतरे। 42 ड्रोन ने नारोवाल सीमा क्षेत्र से अपनी यात्रा शुरू की और फिरोजपुर सीमा क्षेत्र में उतरे। नारोवाल से 14 ड्रोन गुरदासपुर सीमा क्षेत्र में पहुंचे। गृह मंत्रालय (एमएचए) के एक अधिकारी ने बताया, “पंजाब के अलावा बहावलनगर से छह अलग-अलग ड्रोन आए और राजस्थान के श्रीगंगानगर सीमा क्षेत्र में पहुंचे। दो ड्रोन टोबा टेक सिंह से बीकानेर सीमा क्षेत्र में उतरे है।

मार्च 2022 से जनवरी 2025 तक 307 ड्रोन मिले

इंडियन एक्सप्रेस के मुता​बिक, गृह मंत्रालय के अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली फोरेंसिक लैब को मार्च 2022 से जनवरी 2025 तक 307 ड्रोन मिले। इनमें से बीएसएफ ने 284 ड्रोन, पंजाब पुलिस ने 20, दिल्ली पुलिस ने दो और मणिपुर पुलिस ने एक ड्रोन जमा किया। अधिकारी ने कहा कि 2022 में 28 ड्रोन जांच के लिए भेजे गए, जबकि 2023 में 115 ड्रोन, पिछले साल 155 और इस साल अब तक नौ ड्रोन भेजे गए। अमृतसर फोरेंसिक लैब के आंकड़ों से पता चलता है कि उसे जांच के लिए 194 ड्रोन मिले थे। अधिकारियों ने कहा, इन 194 में से 190 बीएसएफ, तीन पंजाब पुलिस और एक सेना ने भेजे थे।

– साभार सहित