मात्र 2:45 मिनट के संबोधन में पीएम मोदी ने इंडो पैसिफिक से लेकर क्वाड तक पर भारत का पूरा नजरिया किया साफ, चीन को बिना नाम लिए दिया संदेश

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टोक्यो। पीएम नरेंद्र मोदी ने क्वाड सम्मेलन में आज इंडो पैसिफिक से लेकर क्वाड तक पर भारत का पूरा नजरिया साफ कर दिया। अपने 2:45 मिनट के संबोधन में पीएम मोदी ने क्वाड देशों की मित्रता से लेकर इसकी मजबूती का जिक्र किया। पीएम मोदी के संबोधन से कई बातें निकलकर आईं। इस भाषण में उन्होंने बिना नाम लिए चीन को संदेश भी दे दिया। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कुछ दिन पहले कहा था कि यह समूह नाकाम होकर रहेगा। वहीं, पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि क्वाड ने दुनिया में बड़ी जगह बना ली है। पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें समझिए।

2-45 मिनट का संक्षिप्त भाषण पर मजबूत संदेश

पीएम मोदी ने क्वाड शिखर सम्मेलन में 2-45 मिनट के भाषण में पूरी दुनिया को बड़ा संदेश दिया है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दुनिया की दो तिहाई आबादी रहती है। अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया के इस समूह में पीएम मोदी ने मित्रता, आपसी सहयोग, इंडो-पैसिफिक से लेकर कोविड-19 का जिक्र किया। पीएम मोदी का भाषण संक्षिप्त था लेकिन उन्होंने संदेश काफी मजबूत दिया है।

हिंद-प्रशांत समूह में चारों देश चीन के किसी भी विस्तारवादी नीति को रोकने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। चीन इससे बिफरा हुआ है। कुछ दिन पहले ही अमेरिका ने कहा था कि अगर चीन ताईवान पर आक्रमण करेगा तो वाशिंगटन उसका जवाब देगा। दरअसल, पीएम मोदी ने अपने संबोधन में चार-पांच बड़े मुद्दों का जिक्र कर उसपर भारत का स्टैंड साफ कर दिया है। जिस तेजी से क्वाड आगे बढ़ रहा है, निश्चित तौर पर आने वाले समय में चीन इसे चुनौती देने की कोशिश करेगा लेकिन दुनिया के चार ताकतवर देशों के इस समूह ने काफी रास्ता तय कर लिया है।

चीन को दे दिया संदेश

चीन को क्वाड बैठक से मिर्ची लगी हुई है। कुछ दिन पहले चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा था कि यह बैठक असफल हो जाएगा लेकिन अगर पीएम मोदी के भाषण को देखते हैं तो उन्होंने कहा कि क्वाड ने विश्व पटल पर एक अहम स्थान बना लिया है। यानी चीन को बिना नाम लिए कड़ा जवाब दिया गया है।

पीएम मोदी ने कहा, ‘इतने कम समय में क्वाड समूह ने विश्व पटल पर एक मजबूत स्थान बना लिया है।’ जाहिर है जो चीन क्वाड के असफल होने की दुआ कर रहा है, उसे जवाब मिल गया होगा। चीन ने अमेरिका पर भी निशाना साधा था। पेइचिंग ने कहा कि एशिया में अमेरिका का रणनीति फेल होगी। लेकिन अमेरिका समेत सभी चार क्वाड देशों ने ड्रैगन को बिना नाम लिए सुना दिया है।

मित्रों के बीच होना खुशी की बात, इस वाक्य के संदेश को समझिए

पीएम मोदी ने अपने संबोदन के शुरुआत में कहा कि टोक्यो में मित्रों के बीच होना खुशी की बात है। यहां ये ध्यान देना होगा कि फिलहाल रूस और यूक्रेन के बीच जंग चल रही है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूस को लेकर तटस्थ नीति अपना रखा है। अमेरिका, जापान ने भारत पर रूस के खिलाफ बयान देने का दबाव बनाया लेकिन भारत अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ। इन सबके बीच क्वाड की बैठक में भारत का उन देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मिलना ये बताता है कि नई दिल्ली रूस पर तटस्थ स्टैंड के बाद भी अपने मित्रों को पूरा तवज्जो देता है। हाल के दिनों में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया देशों के साथ भारत के रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। सभी देश आपस में कारोबार करने पर सहमत हैं।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड का रुख भी कर दिया साफ

पीएम मोदी ने अपने भाषण में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आपसी सहयोग से फ्री ओपन इंडो-पैसिफिक रिश्तों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आपसी विश्वास और लोकतांत्रिक शक्तियों को क्वाड संगठन नई ऊर्जा दे रहा है। दरअसल, पीएम मोदी की इस लाइन में कई संदेश छिपे हुए हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर चीन गाहे-बगाहे अपनी मंशा साफ करते रहा है। इस क्षेत्र में चीन के दबदबे को क्वाड से सीधी चुनौती मिल रही है। चीन इससे बौखलाया हुआ है। क्वाड के गठन के बाद से ये चारों देश लगातार ऐसे समझौते कर रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र में चीन की पकड़ को ढीली की जा सके। चीन क्वाड को अपने खिलाफ साजिश बताता है। लेकिन पीएम मोदी ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मुक्त व्यापार की तरफ इशारा किया है। यानी इस इलाके में सभी देशों को व्यापार करने की खुली छूट होगी। चीन के लिए ये सख्त संदेश माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड कंस्ट्रक्टिव (रचनात्मक) एजेंडे के साथ आगे बढ़ रहा है। इससे क्वाड की छवि एक फोर्स फॉर गुड के रूप में और भी सुदृढ़ होती जाएगी।

चीन की तकनीक के जरिए होगी घेराबंदी

चीनी टेलीकॉम कंपनी हुआवे (Huawei) पर जासूसी और डेटा चोरी के आरोप हैं। क्वाड के चारों देश इससे निजात पाने के लिए अपनी घरेलू कंपनियों को हुआवे से मुकाबले के लिए बढ़ावा देने की तैयारी कर चुकी है।

चारों देशों की घरेलू कंपनियां हुआवे के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। अगर ऐसा होता है तो इससे दो बड़े फायदे होंगे। पहला, डेटा जोरी और जासूसी का खतरा खत्म हो जाएगा। दूसरा, सुरक्षा पर भी खतरा खत्म हो जाएगा। चीन इस कंपनी के जरिए सुरक्षा प्रतिष्ठानों में घुसने की कोशिश करता है। तो आने वाले समय में क्वाड के देश चीन को तकनीक के क्षेत्र में कड़ी टक्कर देते दिखेंगे।

क्वाड की शुरुआत क्यों हुई समझिए

दुनिया में 2004 में आई भीषण सुनामी के बाद क्वाड जैसा एक समूह बनाने की बात शुरू हुई थी। भारत ने इस सुनामी के बाद अपने पड़ोसी देशों के लिए मदद भेजी थी। बाद में इस पहल में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भी जुड़ गए थे। हालांकि, क्वाड बनाने श्रेय जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे को जाता है। 2006-07 में आबे ने क्वाड की नींव रख दी।

क्वाड का मतलब ‘क्वाड्रीलेटरल सुरक्षा वार्ता’ से है। इसकी पहली अनौपचारिक बैठक 2007 में मनीला में आयोजित हुई थी। फिर 2017 में मनीला में आसियान सम्मेलन के दौरान भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान के बीच बात के बाद क्वाड अस्तित्व में आया।

-एजेंसियां