यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा: डबल डेकर स्लीपर बस में लगी आग, नौ यात्रियों की दर्दनाक मौत

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यूपी के यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात एक दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया, जहां एयरपोर्ट इंटरचेंज के निकट 35वें किलोमीटर माइलस्टोन पर एक डबल डेकर स्लीपर बस अचानक आग का भयानक गोला बन गई। इस भीषण अग्निकांड में बस के भीतर फंसे नौ यात्रियों की जिंदा जलने से मौत हो गई। मृतकों में छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल बताए जा रहे हैं। आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि शव बुरी तरह झुलसकर कंकाल में तब्दील हो गए और कई शवों के अंग तक अलग हो गए। रात से शुरू हुआ बचाव और राहत अभियान करीब पांच घंटे तक चला, जिसके बाद बस की बॉडी को काटकर शवों को बाहर निकाला जा सका।

​प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया गहरा दुख

​इस हृदय विदारक दुर्घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है और पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक्स (X) पोस्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हादसे पर दुख जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि बस में हुई यह जनहानि अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति की कामना करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है।

कैसे हुआ हादसा? चालक की सूझबूझ से बची कई जानें

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘राज कल्पना ट्रेवल्स’ की यह स्लीपर बस दिल्ली से महोबा की ओर जा रही थी। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी यात्रियों ने बताया कि जब बस एयरपोर्ट इंटरचेंज के पास पहुंची, तो चालक को बस के इंजन की तरफ से आग लगने की भनक लगी। चालक ने तुरंत बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए बस को ओवरटेकिंग लेन से हटाकर एक्सप्रेसवे के किनारे सोल्डर पर खड़ा कर दिया और आग पर काबू पाने का प्रयास किया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिसके बाद चालक और परिचालक ने तुरंत यात्रियों को बाहर निकलने के लिए चिल्लाना शुरू कर दिया। इस भगदड़ और अफरातफरी के बीच 20 से अधिक यात्रियों ने समय रहते बस से कूदकर अपनी जान बचा ली, लेकिन दुर्भाग्यवश 9 यात्री अंदर ही फंसकर रह गए।

​पांच घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन, कैलाश अस्पताल भेजे गए शव

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, अग्निशमन विभाग और यमुना एक्सप्रेसवे की सुरक्षा टीम फौरन हरकत में आ गई और मौके पर पहुंच गई। बस पूरी तरह आग की चपेट में थी और उसके भीतर से लगातार धुआं उठ रहा था। कड़ी मशक्कत के बाद जब आग पर काबू पाया गया, तब भी बस और उसके अंदर रखा सामान घंटों तक सुलगता रहा। सुरक्षा टीमों ने आधुनिक उपकरणों की मदद से बस की बॉडी को कई जगहों से काटा और अंदर फंसे शवों को बाहर निकाला। सभी क्षत-विक्षत शवों और मिले हुए अंगों को परीक्षण के लिए कैलाश अस्पताल भेज दिया गया।

​सुरक्षा के मद्देनजर यातायात रोकना पड़ा, डीएनए से होगी पहचान

​हादसे की भीषणता को देखते हुए सुरक्षा के एहतियात के तौर पर जेवर टोल और एयरपोर्ट इंटरचेंज पर लगभग आधे घंटे के लिए यातायात पूरी तरह रोक दिया गया। इस दौरान जाम और अफरातफरी के बीच दो कारें भी आपस में टकरा गईं। आग बुझाने और राहत कार्य पूरा होने के बाद ही एक्सप्रेसवे पर आवागमन सुचारू कराया जा सका। बस में लगी आग के सटीक कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों ने आग लगने के दौरान पटाखे जैसी तेज आवाजें आने की बात कही है।

​उधर, प्रशासन ने सुरक्षित बचे सभी यात्रियों को जेवर टोल पर प्राथमिक उपचार मुहैया कराया और टेंपो ट्रैवलर के जरिए उनके गंतव्य के लिए रवाना किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव पूरी तरह जल जाने के कारण मौके पर उनकी शिनाख्त संभव नहीं हो सकी है। ऐसे में बस की ऑनलाइन व ऑफलाइन टिकट बुकिंग डिटेल के आधार पर यात्रियों के परिजनों से संपर्क साधा जा रहा है। परिजनों के डीएनए सैंपल लेकर शवों से उनका मिलान कराया जाएगा, जिसके बाद ही आधिकारिक तौर पर मृतकों की पहचान पुष्ट हो पाएगी।

गौतमबुद्धनगर के सीएफओ प्रदीप कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में बस के एसी में शॉर्ट सर्किट या स्पार्क होने के बाद इंजन लुब्रिकेंट ऑयल में आग लगने और उसके तेजी से फैलने की बात सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर बस के चालक और परिचालक को हिरासत में ले लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।