रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: पहली बार ₹92 के पार पहुंचा डॉलर, आम आदमी की जेब पर ‘दोहरी मार’

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मुंबई। वैश्विक बाजार में बढ़ते तनाव और डॉलर की मजबूती के बीच बुधवार को भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। अंतरबैंकिंग विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया पहली बार 92 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। शुरुआती कारोबार में यह 55.75 पैसे की गिरावट के साथ 92.05 पर खुला और खबर लिखे जाने तक 92.17 प्रति डॉलर तक फिसल गया।

मिडिल ईस्ट के तनाव का असर

इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़कर करीब 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

निवेशक डॉलर की ओर झुके

वैश्विक तनाव के माहौल में विदेशी निवेशक जोखिम भरे निवेश से दूरी बना रहे हैं। शेयर बाजार से पूंजी निकालकर निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर में पैसा लगा रहे हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ी है और अन्य मुद्राओं की तुलना में इसकी कीमत मजबूत हुई है, जिसका असर रुपये पर पड़ा है।

इस साल रुपये की कमजोर चाल

साल 2026 में अब तक रुपये में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। इस वजह से यह उभरते बाजारों की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है।

आम लोगों पर पड़ेगा असर

रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम नागरिकों की जेब पर पड़ सकता है। विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और विदेश यात्रा की योजना बनाने वालों के लिए डॉलर खरीदना महंगा हो जाएगा। इसके अलावा भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका भी बढ़ गई है। मोबाइल, लैपटॉप और विदेश से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दाम भी बढ़ सकते हैं क्योंकि इनका भुगतान डॉलर में होता है।

बाजार की नजर वैश्विक हालात पर

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है। पिछले महीने भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद बाजार में कुछ सुधार की उम्मीद जगी थी, लेकिन ताजा वैश्विक घटनाक्रम ने उस राहत को कमजोर कर दिया है।