लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जिला अदालत (कोर्ट) के बाहर रविवार को उस समय अचानक भारी अफरा-तफरी और अफरातफरी का माहौल बन गया, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े आदेश के अनुपालन में नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम वहां बने अवैध चैंबरों को ध्वस्त करने पहुंच गई। प्रशासन की इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई का विरोध कर रहे वकीलों ने लामबंद होकर सड़क पर उतरकर जमकर प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते हालात इतने ज्यादा बेकाबू हो गए कि पुलिस और प्रदर्शनकारी वकीलों के बीच तीखी झड़प, पथराव और फिर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करने तक की नौबत आ गई।
हाईकोर्ट के आदेश पर एक्शन, पलक झपकते ही हिंसक हुआ प्रदर्शन
दरअसल, लखनऊ में नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी टीम भारी पुलिस बल और पीएसी के साथ कोर्ट परिसर के बाहर अवैध रूप से बने वकीलों के चैंबरों को हटाने की मंशा से पहुंची थी। प्रशासन को देखते ही वहां मौजूद वकीलों ने इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध करते हुए तीखी नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते यह पूरा मामला हिंसक रूप अख्तियार कर गया। भीड़ को तितर-बितर करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अंततः कड़ा रुख अपनाते हुए लाठियां भांजनी पड़ीं, जिससे मौके पर भगदड़ मच गई।
चैंबर के भीतर खुद को बंद कर फांसी लगाने की कोशिश और हाई वोल्टेज ड्रामा
इस पूरे हाई-वोल्टेज प्रदर्शन के दौरान एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला वाकया सामने आया, जब एक युवा वकील ने प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में खुद को अपने ही चैंबर के अंदर बंद कर लिया और वहां फांसी लगाने की धमकी देने लगा। इसके अलावा कुछ अन्य वकीलों ने भी खुद को अपने-अपने चैंबरों के भीतर लॉक कर लिया। वहीं, आक्रोशित वकीलों का एक गुट कार्रवाई को रोकने के लिए सीधे गरजते हुए बुलडोजर के सामने जाकर खड़ा हो गया और लगातार नगर निगम की मशीनरी को रोकने का प्रयास करता रहा। माहौल बिगड़ता देख मौके पर मुस्तैद पुलिस ने तुरंत बल प्रयोग किया और चैंबर के दरवाजों को तोड़कर भीतर बंद वकीलों को सुरक्षित बाहर निकाला।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखा लाठीचार्ज और पथराव का खौफनाक मंजर
इस पूरे उपद्रव और टकराव के कई वीडियो अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारी वकीलों पर लाठियां बरसाते नजर आ रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर से आक्रोशित वकील भी लगातार पुलिस टीम को निशाना बनाकर पथराव करते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने उपद्रव और अराजकता फैला रहे वकीलों को खदेड़ने के लिए काफी सख्ती दिखाई। इस हिंसक टकराव और लाठीचार्ज के दौरान कई प्रदर्शनकारी वकीलों को चोटें आई हैं और वे घायल हो गए हैं।
छावनी में तब्दील हुआ इलाका, सामान जब्त कर गरजा बुलडोजर
घटना के बाद पैदा हुई बेहद तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। मौके पर तुरंत चार एसीपी (ACP), भारी संख्या में पीएसी (PAC) के जवान और करीब 10 थानों की पुलिस फोर्स को सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर तैनात किया गया है। भारी सुरक्षा घेरे के बीच नगर निगम की टीम ने अवैध चैंबरों पर बेरहमी से बुलडोजर चलाया और वहां वकीलों द्वारा रखी गईं कुर्सियां, मेज, चटाइयां और अन्य सभी जरूरी सामान को जब्त कर अपने वाहनों में लाद लिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान कई वकील असहाय होकर अपने चैंबरों को बचाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाते और रोते-बिलखते नजर आए।
साल 2020 से जुड़ा है विवाद, पहले ही जारी किया जा चुका था नोटिस
इस पूरे मामले की जड़ें पुरानी हैं। बताया जा रहा है कि साल 2020 में सदर तहसील इलाके में भी कुछ वकीलों के चैंबर तोड़े गए थे, जिसके बाद यह कानूनी लड़ाई शुरू हुई थी। इसी मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पूर्व में उत्तर प्रदेश सरकार से इस पर विस्तृत जवाब मांगा था। इसके बाद, हाल ही में 7 मई को हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए इस पूरे क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने का अंतिम आदेश जारी कर दिया।
हाईकोर्ट के इसी आदेश के क्रम में बीते 12 मई को नगर निगम की टीम ने मौका मुआयना करके सभी अवैध चैंबरों पर बकायदा लाल निशान लगाए थे और नोटिस चस्पा कर वकीलों को स्वयं ही अतिक्रमण खाली करने का निर्देश दिया था। रविवार को जब दी गई मोहलत खत्म हो गई, तो इसी न्यायिक आदेश के तहत नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम इस भारी-भरकम कार्रवाई को अंजाम देने जमीन पर उतरी थी।


