अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की रकम और कीमती वस्तुओं के गबन के आरोपों के बाद सोमवार को राम मंदिर ट्रस्ट की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और असाधारण बैठक संपन्न हुई। बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने मंत्रोच्चार के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।
उन्होंने अत्यंत भावुक लहजे में कहा कि यह हमारे लिए बेहद दुखद और लज्जाजनक स्थिति है। जिन लोगों ने राम मंदिर के लिए अपने प्राणों और परिवारों तक की परवाह नहीं की, उनके समर्पण के बीच मंदिर में हुई यह चोरी हम सभी के लिए पीड़ादायक है।
चोरी का सच और पारदर्शिता
गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि मामला एसआईटी के पास है और वे अपना काम कर रही हैं। हमें 22 जुलाई को फिर से बैठक करनी है, तब तक एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आ जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चोरी तो चोरी है, इसके पीछे छिपे अपराधियों को हर हाल में खोजा जाएगा।
उन्होंने समाज में फैल रहे भ्रम को दूर करते हुए कहा कि केवल दानपात्र ही नहीं, बल्कि कीमती वस्तुओं की चोरी के जो आरोप लग रहे हैं, उन्हें खारिज करने के लिए ट्रस्ट ने 2,800 से अधिक वस्तुओं का विस्तृत रजिस्टर पेश किया। मीडिया के सामने नमूने के तौर पर कुछ बेशकीमती वस्तुएं भी रखी गईं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव
इस बैठक में ट्रस्ट ने प्रशासनिक ढांचे को बदलने का बड़ा फैसला लिया। कोषाध्यक्ष ने जानकारी दी कि महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है। इसके साथ ही, विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को भी ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। फिलहाल चंपत राय की जिम्मेदारी कृष्ण मोहन संभालेंगे। हालांकि नए महासचिव के नाम का औपचारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन कृष्ण मोहन को अंतरिम रूप से कामकाज की कमान सौंपी गई है।
चंपत राय के बचाव में बोले गोविंद देव गिरि
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने चंपत राय के साथ अपने 32 साल पुराने संबंधों का जिक्र किया और उनके व्यक्तित्व पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा, “मैं चंपत राय को तीन दशकों से जानता हूं। उनकी इकलौती गलती यह रही कि उन्होंने अपने करीबियों पर आंख मूंदकर भरोसा किया।”
उन्होंने आगे कहा कि जब राम जन्मभूमि आंदोलन के बारे में कोई नहीं जानता था, तब से चंपत राय ने इस मुहिम को सींचा है। हम उनका पूरा सम्मान करते हैं। यह समझ से परे जरूर है कि वे अपने इर्द-गिर्द पनप रही साजिशों को कैसे नहीं भांप पाए और ऐसे गलत लोगों को लंबे समय तक साथ रखा। मेरी नजर में चंपत राय बिल्कुल बेदाग हैं, वे अपराधी नहीं हैं, बस उनसे लापरवाही की एक बड़ी चूक जरूर हुई है।


