सरकार का बड़ा फैसला: गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से लगी रोक, प्याज को प्रतिबंधित श्रेणी से बाहर किया

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नई दिल्‍ली। रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग से पूरी दुनिया में गेहूं की कीमतों में जोरदार इजाफा और घरेलू स्तर पर गेहूं की कीमत बढ़ने के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए आज शनिवार को गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 13 मई को जारी अधिसूचना में कहा है कि इस अधिसूचना की तारीख या उससे पहले जिस खेप के लिए अपरिवर्तनीय ऋण पत्र (एलओसी) जारी किए गए हैं, उसके निर्यात की अनुमति होगी।

गौरतलब है कि कई प्रमुख राज्यों में सरकारी खरीद की प्रक्रिया काफी सुस्त चल रही है और लक्ष्य से काफी कम गेहूं की खरीदारी हुई है। इसकी वजह यह है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ज्यादा कीमत बाजार में मिल रही है।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक। देश ने वित्त वर्ष 2021-22 कुल 70 लाख टन गेहूं का निर्यात किया, जबकि बीते अप्रैल महीने की बात करें तो भारत ने रिकॉर्ड 14 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है। यहां बता दें कि देश में महंगाई आसमान छू रही है, खुदरा महंगाई एक बार फिर लंबी छलांग मारते हुए अप्रैल महीने में 7.79 फीसदी पर पहुंच चुकी है। इस बीच अप्रैल में खाद्य पदार्थों पर महंगाई 8.38 फीसदी के स्तर पर पहुंच चुकी है।

प्याज को प्रतिबंधित श्रेणी से बाहर किया

रूस-यूक्रेन जंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गेहूं की कीमतों में 40 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जिससे गेहूं का निर्यात बढ़ा है। इसके अनुरूप घरेलू स्तर पर मांग बढ़ने के बीच गेहूं और गेहूं के आटे के दाम भी आसमान छू रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले आटे की कीमत में अब तक करीब 13 फीसदी की तेजी आ चुकी है। गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से बैन लगाने के साथ ही डीजीएफटी ने एक दूसरी अधिसूचना में जानकारी दी कि प्याज के बीज की निर्यात नीति में भी बदलाव किया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से सीमित श्रेणी के तहत रखा गया है। यहां बता दें कि इससे पहले प्याज के बीज का निर्यात भी प्रतिबंधित श्रेणी में था।

इसके अलावा जिन देशों को पहले ही इसके निर्यात की अनुमति दी जा चुकी है, उन्हें इसका निर्यात जारी रहेगा।

– एजेंसी

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