उत्तर प्रदेश की सियासी जंग का केंद्र अब लखनऊ से शिफ्ट होकर नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) आ गया है। कभी ‘अशुभ’ माने जाने वाले इस जिले को अब भाजपा, सपा और बसपा तीनों ही दल 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए ‘सत्ता की चाबी’ मान रहे हैं। अगले एक महीने में नोएडा रैलियों और बड़े शिलान्यासों का गवाह बनने वाला है, जो पश्चिमी यूपी की राजनीतिक दिशा तय करेगा।
भाजपा: विकास के ‘सेमीकंडक्टर’ से साधेगी निशाना
सत्तारूढ़ भाजपा विकास के बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए अपना किला मजबूत करने में जुटी है। 21 फरवरी को यमुना सिटी में उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट का शिलान्यास होने जा रहा है, जिसे सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव अंजाम देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल माध्यम से इस मिशन-2027 का बिगुल फूंकेंगे। साथ ही, जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन भाजपा के लिए सबसे बड़ा ट्रंप कार्ड साबित होने वाला है।
सपा: अखिलेश तोड़ेंगे अंधविश्वास, PDA कार्ड से घेराबंदी
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने नोएडा के पुराने अंधविश्वासों को दरकिनार कर दिया है। 29 मार्च को दादरी में ‘समाजवादी समानता भाईचारा रैली’ के जरिए वे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को धार देंगे। 2024 की सफलता से उत्साहित सपा अब पश्चिमी यूपी में गुर्जर-मुस्लिम-दलित समीकरण के सहारे 2012 जैसा इतिहास दोहराने की तैयारी में है।
बसपा: कांशीराम जयंती पर दलित वोटों का शक्ति प्रदर्शन
मायावती का गृह जनपद होने के नाते नोएडा बसपा के लिए साख का सवाल है। 15 मार्च को मान्यवर कांशीराम की जयंती पर राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल पर लाखों कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगेगा। बसपा इस विशाल रैली के जरिए यह साबित करना चाहती है कि पश्चिमी यूपी के दलित वोट बैंक पर आज भी उसकी पकड़ मजबूत है।
क्यों अहम है नोएडा
गौतमबुद्ध नगर को प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र माना जाता है। जेवर एयरपोर्ट, प्रस्तावित फिल्म सिटी और औद्योगिक निवेश ने इसकी अहमियत बढ़ाई है। राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन है कि यहां मजबूत पकड़ का असर एनसीआर और पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर दिख सकता है । 2022 में भाजपा को यहां बढ़त मिली थी, लेकिन इस बार विपक्षी दल भी पूरी ताकत लगा रहे हैं।

