झूठे केस, पुरुष मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों की हिरासत पर खुली बहस: मुंबई में शुरू हुआ ‘एकम न्याय डायलॉग’

विविध

मुंबई। एकम न्याय फाउंडेशन द्वारा रविवार 10 मई 2026 को नेहरू सेंटर, वर्ली में “एकम न्याय डायलॉग” नामक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। दोपहर 2:30 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में पुरुषों के अधिकारों, लिंग न्याय, मानसिक स्वास्थ्य और कानूनी मुद्दों पर खुलकर चर्चा होगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता व प्रसिद्ध पत्रकार दीपिका नारायण भारद्वाज करेंगी। इसमें देश के कई प्रमुख न्यायाधीश, वकील, डॉक्टर और मीडिया विशेषज्ञ शामिल होंगे। आयोजकों का कहना है कि आज के समय में लिंग आधारित कानूनों में संतुलन की जरूरत है और इस कार्यक्रम के जरिए समाज में जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं के रूप में पूर्व न्यायाधीश जस्टिस साधना जाधव और जस्टिस रोशन दलवी शामिल होंगी। इसके अलावा आभा सिंह, वंदना शाह, डॉ. केरसी चावड़ा, डॉ. सोनाली कुसुम, डॉ. राकेश कपूर, अशोक पंडित, अपूर्व असरानी, अमित लखानी, अमित देशपांडे और डॉ. मिथुन खेरड़े जैसे गणमान्य लोग भी अपने विचार रखेंगे। कार्यक्रम दोपहर तीन बजे ज्ञान सत्र से शुरू होगा जिसमें एडवोकेट अमित लखानी ‘पुरुषों के लिए वैवाहिक विवादों में क्या करें और क्या न करें’ विषय पर व्याख्यान देंगे। इसके बाद डॉ. मिथुन खेरड़े झूठे मामलों से निपटने के लिए मनोवैज्ञानिक लचीलापन पर बात करेंगे। शाम चार बजे जस्टिस साधना जाधव उद्घाटन भाषण देंगी।

आज भारत में कई पुरुष झूठे केस (जैसे 498A, दहेज उत्पीड़न, बलात्कार के झूठे आरोप) का शिकार हो रहे हैं। इन मामलों में गिरफ्तारी, मानसिक तनाव, आर्थिक बर्बादी और सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ता है। सबसे दुखद बात यह है कि इनमें से कई मामले बाद में झूठे साबित होते हैं, लेकिन तब तक परिवार बिखर चुका होता है।

तलाक, हिरासत की लड़ाई और सामाजिक दबाव के कारण पुरुष आत्महत्या की दर बहुत ज्यादा है, लेकिन इसके बारे में खुलकर चर्चा नहीं होती। बच्चों पर भी तलाक के दौरान गहरा मानसिक असर पड़ता है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कानून वर्तमान में ज्यादातर महिलाओं की सुरक्षा पर केंद्रित हैं, लेकिन पुरुषों के लिए कोई मजबूत सुरक्षा कवच नहीं है। जेंडर न्यूट्रल कानून की मांग लंबे समय से की जा रही है,

एकम न्याय डायलॉग इसी असंतुलन को दूर करने के लिए आयोजित किया गया है। इसका उद्देश्य सिर्फ पुरुषों की बात करना नहीं, बल्कि संतुलित लिंग न्याय (Balanced Gender Justice) की दिशा में समाज और कानून को सोचने के लिए मजबूर करना है। न्यायाधीशों, वकीलों, डॉक्टरों और मीडिया विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर खुली चर्चा करना, ताकि गलतफहमियां दूर हों, जागरूकता बढ़े और बेहतर, निष्पक्ष कानून बन सकें।

-मदन मोहन सोनी