ग्रेटर आगरा परियोजना पर पर्यावरणीय संकट: यमुना के डूब क्षेत्र में मिला 23 हेक्टेयर हिस्सा, निर्माण पर लगी रोक

स्थानीय समाचार

आगरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी और बहुप्रतीक्षित “ग्रेटर आगरा” परियोजना इस समय एक बड़े पर्यावरणीय और कानूनी संकट के घेरे में आ गई है। करीब 5,142 करोड़ रुपये के इस मेगा प्रोजेक्ट का लगभग 23 हेक्टेयर हिस्सा यमुना नदी के डूब क्षेत्र (फ्लड जोन) के अंतर्गत पाया गया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के एक हालिया सैटेलाइट सर्वे में इस बात का खुलासा होने के बाद, प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए परियोजना के तहत प्रस्तावित दो टाउनशिप क्षेत्रों में सभी प्रकार की निर्माण गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

​डूब क्षेत्र में नहीं बनेगा कोई कंक्रीट ढांचा, अब बनेगी वॉटर बॉडी

आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यमुना के डूब क्षेत्र में चिन्हित की गई इस जमीन पर अब किसी भी तरह का स्थायी या कंक्रीट का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। पर्यावरणीय नियमों और पारिस्थितिकी तंत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, एडीए ने अब इस पूरे हिस्से को वॉटर बॉडी (जल निकाय) और ग्रीन बेल्ट के रूप में तब्दील करने का फैसला किया है।

​पर्यावरण विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि फ्लड जोन में बड़े पैमाने पर कंक्रीट का जाल बिछाया जाता, तो भविष्य में यह कदम भयंकर जलभराव, विनाशकारी बाढ़ और यमुना के तटीय पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता था। यही वजह है कि अब पूरी परियोजना के मास्टर प्लान और विकास मॉडल में बड़े स्तर पर संशोधन की कवायद शुरू कर दी गई है।

बिना पूरी पर्यावरण मंजूरी के काम शुरू होने पर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद ग्रेटर आगरा परियोजना के नियोजन और उसकी कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। पर्यावरणविदों और जानकारों के बीच यह बहस तेज हो गई है कि क्या आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियां (Environmental Clearances) हासिल करने से पहले ही इतनी बड़ी परियोजना को धरातल पर उतारने की जल्दबाजी की गई?

​एनजीटी के सैटेलाइट सर्वे की रिपोर्ट सामने आने के बाद, अब इस प्रोजेक्ट की तकनीकी, कानूनी और पर्यावरणीय समीक्षा बेहद जरूरी हो गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इस संवेदनशील डूब क्षेत्र में निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाता, तो न केवल भविष्य में गंभीर कानूनी अड़चनें पैदा होतीं, बल्कि मॉनसून के दौरान भारी बारिश होने पर इस पूरी टाउनशिप में बाढ़ का खतरा हमेशा बना रहता।

​20 मई को होने वाली एडीए बोर्ड बैठक पर टिकीं निगाहें

​इस विवाद और संकट के समाधान के लिए आगामी 20 मई को होने वाली आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) की बोर्ड बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में ग्रेटर आगरा परियोजना के संशोधित स्वरूप (Revised Layout), भूखंडों की नई दरों और फ्लड जोन से प्रभावित जमीन के वैकल्पिक उपयोग जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि पर्यावरण मानकों को शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए इस ड्रीम प्रोजेक्ट के मूल स्वरूप में कई बड़े और दूरगामी बदलावों पर अंतिम मुहर लग सकती है।