लखनऊ/पीलीभीत। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की रणभेरी बजने में अभी वक्त है, लेकिन सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। ताज़ा घटनाक्रम में पीलीभीत के कद्दावर नेता और पूर्व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा की सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से हुई मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी से मोहभंग होने के बाद हेमराज जल्द ही ‘साइकिल’ पर सवार होकर अपनी घर वापसी कर सकते हैं।
बीजेपी के लिए बड़ा झटका?
साल 2023 के निकाय चुनाव के दौरान अखिलेश यादव का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले हेमराज वर्मा पिछले कुछ समय से भगवा खेमे में शांत नजर आ रहे थे। सूत्रों का दावा है कि वह पीलीभीत की सदर विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो पीलीभीत जैसे बीजेपी के मजबूत गढ़ में सत्ताधारी दल के समीकरण बिगड़ सकते हैं।
अखिलेश के ‘खास’ से मंत्री पद तक का सफर
हेमराज वर्मा की राजनीतिक यात्रा बेहद दिलचस्प रही है। एक ग्राम प्रधान से अपना करियर शुरू करने वाले हेमराज को अखिलेश यादव ने ही मुख्यधारा की राजनीति में पहचान दिलाई थी। साल 2012 में बरखेड़ा सीट से पहली बार विधायक बनने के बाद उन्हें ‘सरप्राइज’ तरीके से मंत्री पद मिला था। कहा जाता है कि जब अखिलेश यादव ने उन्हें लखनऊ बुलाकर खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री की शपथ दिलाई, तब वह मॉर्निंग वॉक कर रहे थे।
हार के बावजूद बरकरार है जनाधार
भले ही 2017 और 2022 के चुनावों में हेमराज को जीत नसीब नहीं हुई, लेकिन उनका वोट बैंक लगातार मजबूत रहा है। 2022 के चुनाव में उन्हें 71 हजार से ज्यादा वोट मिले थे, जो उनकी जमीनी पकड़ को साबित करते हैं। अब ढाई साल बाद फिर से सपा के करीब आना यह संकेत देता है कि अखिलेश यादव 2027 के लिए अपने पुराने और भरोसेमंद लड़ाकों को फिर से एकजुट कर रहे हैं।

