आगरा SN मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने किया ‘कमाल’: छोटी आंत की नस में था 99% ब्लॉकेज, जटिल बाईपास सर्जरी से ठेला संचालक को दिया नया जीवन

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​आगरा: ताजनगरी के एसएन मेडिकल कॉलेज (SNMC) के डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। मथुरा के एक गरीब ठेला संचालक, जो पिछले दो साल से पेट के असहनीय दर्द के कारण ‘कौर-कौर’ को मोहताज था, उसे डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी के जरिए मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया है। मरीज की छोटी आंत को खून पहुंचाने वाली मुख्य धमनी में 99 प्रतिशत ब्लॉकेज था, जिसे बेहद दुर्लभ ‘Ilio-SMA Bypass’ सर्जरी के जरिए ठीक किया गया।

दो साल का दर्द, 30 किलो वजन घटा और लाखों की बर्बादी

​मथुरा के छाता-कोसी निवासी 38 वर्षीय राजेंद्र शर्मा सड़क किनारे ठेला लगाकर अपने परिवार का पेट पालते हैं। पिछले दो वर्षों से उन्हें कुछ भी खाते ही पेट में भयंकर दर्द होता था। हालत इतनी बिगड़ी कि उन्होंने डर के मारे खाना ही छोड़ दिया, जिससे उनका वजन 30 किलो तक कम हो गया। दिल्ली, आगरा और मथुरा के कई बड़े अस्पतालों में 4 लाख रुपये फूंकने के बाद भी बीमारी पकड़ में नहीं आई। अंततः आगरा में हुई सीटी एंजियोग्राफी ने इस जानलेवा रहस्य से पर्दा उठाया।

गैंग्रीन का खतरा और लीवर संक्रमण की चुनौती

जांच में सामने आया कि राजेंद्र की SMA (सुपीरियर मेसेंटेरिक आर्टरी) पूरी तरह बंद होने की कगार पर थी। रक्त प्रवाह रुकने के कारण आंतों में गैंग्रीन (सड़न) फैलने का खतरा था, जो जानलेवा साबित हो सकता था। स्थिति तब और पेचीदा हो गई जब पता चला कि मरीज लीवर संक्रमण से भी जूझ रहा है। ऐसी नाजुक स्थिति में सर्जरी करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।

​डॉ. सुशील सिंघल की टीम ने रचा इतिहास

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की सलाह पर मरीज को एसएन के CTVS विभाग रेफर किया गया। यहाँ कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल और उनकी टीम ने जोखिम भरा फैसला लिया। डॉक्टरों ने पेट खोलकर पैर की ‘इलियक आर्टरी’ से एक कृत्रिम नस (ग्राफ्ट) के जरिए आंतों तक नया रास्ता (Bypass) बनाया। जैसे ही यह बाईपास चालू हुआ, आंतों में खून का दौरा फिर से दौड़ने लगा।

​अब बिना दर्द के ‘पहला निवाला’, चेहरे पर लौटी मुस्कान

सफल ऑपरेशन के बाद राजेंद्र शर्मा अब बिना किसी दर्द के सामान्य भोजन कर पा रहे हैं। दो साल तक मौत से लड़ने वाले राजेंद्र को स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। परिजनों ने इसे डॉक्टरों के रूप में भगवान का आशीर्वाद बताया है।

एसएन में अब दिल्ली-जयपुर जैसा इलाज: डॉ. प्रशांत गुप्ता

एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस सफलता पर टीम को बधाई देते हुए कहा कि कॉलेज की सुपरस्पेशियलिटी विंग अब दिल्ली और जयपुर के बड़े अस्पतालों को टक्कर दे रही है। पश्चिमी यूपी के मरीजों को अब जटिल और महंगे ऑपरेशनों के लिए महानगरों की दौड़ लगाने की जरूरत नहीं है।