आगरा के निजी स्कूलों को जिलाधिकारी का अल्टीमेटम: आरटीई के गरीब बच्चों को गेट से भगाया तो खैर नहीं, एक सप्ताह में माँगा शत-प्रतिशत प्रवेश

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​आगरा: जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कलेक्ट्रेट सभागार में ‘निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009’ (RTE) के तहत वर्ष 2026-27 के नामांकनों की कड़ी समीक्षा की। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने उन निजी स्कूलों के प्रति भारी नाराजगी व्यक्त की, जिन्होंने बच्चों को स्कूल आवंटित होने के बावजूद अब तक प्रवेश नहीं दिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि पात्र बच्चों को प्रवेश से वंचित करने वाले स्कूलों के खिलाफ अब प्रशासन कड़े एक्शन की तैयारी में है।

​शून्य प्रवेश वाले स्कूलों को लगाई फटकार

बैठक में बीएसए (BSA) ने 50 ऐसे स्कूलों की सूची प्रस्तुत की, जहां अभिभावकों के संपर्क करने के बाद भी प्रवेश नहीं दिया गया। जिलाधिकारी ने नाम लेकर कई प्रतिष्ठित स्कूलों को फटकार लगाई सुमित राहुल गोयल मेमोरियल: 22 आवंटित – 0 प्रवेश, ​सिंपकिंस सीनियर सेकेंडरी 22 आवंटित – 0 प्रवेश, ​द इंटरनेशनल स्कूल आगरा 17 आवंटित – 0 प्रवेश, ​होली पब्लिक स्कूल, सिकन्दरा 10 आवंटित – 0 प्रवेश, गायत्री पब्लिक स्कूल 09 आवंटित – 0 प्रवेश, ​इसके साथ ही होली पब्लिक किड्स स्कूल, एसएमडी प्राइमरी और होली लाइट पब्लिक स्कूल में भी शून्य प्रवेश पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई।

“पात्रता की जांच करना आपका काम नहीं”

स्कूलों द्वारा पात्रता (Eligibility) पर सवाल उठाने पर जिलाधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अभिभावकों को कागजी कार्रवाई के बहाने दौड़ाना या गेट से भगाना बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा, “बच्चा पात्र है या नहीं, इसकी जांच करना स्कूल का अधिकार नहीं है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा लॉटरी से आवंटित प्रत्येक बच्चे का प्रवेश लें। यदि संदेह है, तो अंडरटेकिंग लेकर प्रवेश दें और प्रशासन को सूचित करें, जांच हम कराएंगे।”

धोखाधड़ी करने वाले अभिभावकों पर होगी FIR

​जिलाधिकारी ने एक तरफ स्कूलों को कड़े निर्देश दिए, तो दूसरी तरफ पारदर्शिता का भी ध्यान रखा। उन्होंने बीएसए को निर्देशित किया कि यदि कोई अभिभावक गलत दस्तावेज लगाकर अपात्र होने के बावजूद प्रवेश लेने की कोशिश करता पाया जाए, तो उसके विरुद्ध तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए।

एक सप्ताह का समय, फिर होगा एक्शन

​आगरा जनपद में कुल 8112 आवंटनों के मुकाबले अब तक केवल 6100 बच्चों का ही प्रवेश हो पाया है। शेष करीब 2000 बच्चों के भविष्य को लेकर जिलाधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (ABSA) को फील्ड स्तर पर सक्रिय होने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी स्कूलों को एक सप्ताह की समय-सीमा देते हुए कहा कि इसके बाद किसी भी स्तर पर बहानेबाजी या लापरवाही मिलने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन सीधे कार्रवाई की जद में होगा।

​वाहन सुरक्षा और फिटनेस पर भी निर्देश

​बैठक में बच्चों की सुरक्षा पर चर्चा करते हुए जिलाधिकारी ने उन स्कूलों को भी कड़े निर्देश दिए जिनके पास स्वयं के वाहन नहीं हैं। उन्होंने ऐसे स्कूलों को चालकों का सत्यापन, वाहनों की फिटनेस और परमिट रिन्यूअल सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी तय करने को कहा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड, एआरटीओ आलोक अग्रवाल सहित सभी खंड शिक्षा अधिकारी और निजी स्कूलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।