मुंबई। इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारतीय वित्तीय बाजारों की कमर तोड़ दी है। बुधवार, 4 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार में ‘ब्लैक वेडनेसडे’ जैसा मंजर दिखा, जहां ओपनिंग बेल बजते ही सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए।
शेयर बाजार: हाहाकार के बीच 1700 अंक फिसला सेंसेक्स
कारोबारी हफ्ते के तीसरे दिन बाजार खुलते ही बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। बीएसई (BSE) सेंसेक्स 1,710.03 अंक (2.13%) की भीषण गिरावट के साथ 78,528.82 पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 476.90 अंक टूटकर 24,388.80 के स्तर पर ओपन हुआ। सुबह 9:20 बजे तक बाजार की हालत और खराब हो गई और सेंसेक्स 1,741 अंक तक गोता लगा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल तकनीकी नहीं है, बल्कि युद्ध की आशंका से उपजे वैश्विक डर का नतीजा है।
सोना-चांदी: संकट के समय निवेशकों का ‘सेफ हेवन’
जहां एक तरफ शेयर बाजार में निवेशकों के पैसे डूब रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की मांग आसमान छू रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 कैरेट सोना ₹1,63,402 प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू गया। खुदरा बाजार में इसकी कीमतें ₹1,68,700 तक दर्ज की गईं। चांदी भी पीछे नहीं रही और औद्योगिक मांग के चलते ₹2,94,900 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर के करीब ट्रेड करती दिखी।
कच्चा तेल: सप्लाई संकट से बढ़ी महंगाई की टेंशन
मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $82.7 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि तनाव और बढ़ा तो सप्लाई चेन बाधित होने की स्थिति में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल का आंकड़ा भी पार कर सकता है। तेल की यह तेजी भारत जैसे आयात निर्भर देशों के लिए महंगाई का नया मोर्चा खोल सकती है।
आगे क्या?
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक भू-राजनीतिक हालात स्थिर नहीं होते, बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं, जिसका असर आने वाले सत्रों में भी देखने को मिल सकता है।

