आगरा: ताजनगरी के सबसे प्रमुख हरित क्षेत्र, पालीवाल पार्क और संजय पार्क, इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और अव्यवस्थाओं की मार झेल रहे हैं। सुबह की ताजी हवा लेने निकलने वाले ‘मॉर्निंग वॉकर्स’ को अब यहाँ गंदगी, टूटी सड़कें और शौचालय के गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है।
उद्यान विभाग और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन पार्कों की सुध नहीं ली गई, तो शहर के ये महत्वपूर्ण ऑक्सीजन हब धूल के गुबार में तब्दील हो जाएंगे।
शौचालय का अकाल: सेहत से खिलवाड़
पालीवाल पार्क में प्रतिदिन सैकड़ों बुजुर्ग और मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित लोग सैर के लिए आते हैं। विडंबना यह है कि पार्क में स्वच्छ शौचालयों का भारी अभाव है। हालत यह है कि लोग प्यास लगने पर भी पानी पीने से कतरा रहे हैं ताकि उन्हें प्रसाधन की समस्या न झेलनी पड़े। मूलभूत सुविधाओं की इस कमी के कारण कई नियमित वॉकर्स ने अब पार्क आना ही छोड़ दिया है।
सड़कों पर ‘कब्जा’ और धूल का गुबार
पर्यावरण प्रहरी प्रदीप खंडेलवाल ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार पिछले 6-7 महीनों से सड़कों पर बिना ढंके निर्माण सामग्री पड़ी है, जिससे प्रदूषण फैल रहा है। भारी मशीनरी सड़कों पर खड़ी कर राहगीरों का रास्ता रोका जा रहा है।
निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार की लेबर ने छोटे तिकोनिया पार्क को ध्वस्त कर वहां झोपड़ियां बना ली हैं, लेकिन नगर निगम और उद्यान विभाग कुंभकर्णी नींद सो रहा है।
जवाबदेही तय करने की मांग
नागरिकों ने मांग की है कि पार्कों में तैनात स्थाई और अस्थाई कर्मचारियों का ब्यौरा (नाम और फोटो) मुख्य द्वार पर लगाया जाए और उनके लिए ड्रेस कोड अनिवार्य हो। साथ ही, राजकीय उद्यान अधीक्षक को हर महीने सुबह पार्क में आकर जनता की समस्याएं सुनने का सुझाव दिया गया है। उधर, संजय प्लेस स्थित संजय पार्क की राजकीय पौधशाला को भी फिर से शुरू करने की मांग उठाई गई है ताकि हरियाली को नया जीवन मिल सके।
प्रशासन से तीखे सवाल
जनता ने मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त से सीधे सवाल किया है कि जो नियम आम आदमी के छोटे निर्माण पर जुर्माने के रूप में लागू होते हैं, वे इन रसूखदार ठेकेदारों पर क्यों नहीं चलते? पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि प्रशासन संरक्षण और संवर्धन तो दूर, कम से कम पार्कों के विनाश को तो तुरंत रोके।

