सीएम योगी की अपराधियों को सीधी चेतावनी, बेटी से दुस्साहस करने वालों की रावण-दुर्योधन जैसी दुर्गति तय

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में एक प्रतिष्ठित मीडिया हाउस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य की कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, धार्मिक अनुशासन और इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर हुए अभूतपूर्व बदलावों पर विस्तार से बात की। मुख्यमंत्री ने बेहद कड़े और स्पष्ट शब्दों में अपराधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अगर किसी ने भी बेटी के साथ जबरन दुस्साहस करने का प्रयास किया, तो उसकी रावण और दुर्योधन जैसी दुर्गति होना पूरी तरह तय है।

मुख्यमंत्री ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि आज से वर्ष पहले जब हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश के शासन की बागडोर संभाली थी, तब हमारे सामने ढेरों गंभीर चुनौतियां खड़ी थीं।

उन्होंने कहा, “मैं यूपी की जमीनी समस्याओं से भली-भांति वाकिफ था। मैं अच्छी तरह जानता था कि पहले यूपी में हर दूसरे दिन दंगे भड़कते थे और प्रदेश के हर एक जिले में मुख्य सत्ता के समांतर एक प्रभावी माफिया सत्ता संचालित होती थी, जिसके इशारे पर जिले का पूरा प्रशासनिक सिस्टम मूकदर्शक बनकर कार्य करता था।”

​”शिक्षकों और डॉक्टरों से वसूला जाता था गुंडा टैक्स, सुरक्षित नहीं थीं बेटियां”

अतीत के माहौल पर तीखा प्रहार करते हुए सीएम योगी ने कहा कि वे इस बात से भी वाकिफ थे कि पहले यहां का हर आम और खास व्यक्ति चाहे वह शिक्षक हो, डॉक्टर हो, व्यापारी हो या समाज से जुड़ा कोई भी शरीफ और सज्जन प्रवृत्ति का व्यक्ति हो, स्थानीय गुंडों को ‘गुंडा टैक्स’ देने के लिए पूरी तरह मजबूर था।

​महिला सुरक्षा के संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मैं यह भी अच्छी तरह जानता था कि इस प्रदेश में बेटियां बिल्कुल सुरक्षित नहीं थीं। विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हालात इतने खराब थे कि हर वह परिवार जिसके घर में बेटी होती थी, वह उसकी सुरक्षा को लेकर दिन में दस बार सोचता था। लोग अपनी बेटियों को स्थानीय स्तर पर पढ़ाने के बजाय प्रदेश के बाहर या तो किसी हॉस्टल (छात्रवास) में या फिर किसी दूर की रिश्तेदारी में भेजने को विवश थे।”

​पुराने यूपी की बदहाली: खजाना खाली और सीमाओं पर दिखता था अंधेरा

मुख्यमंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर के पुराने ढर्रे की याद दिलाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) नाम की कोई चीज नहीं थी। देश के अंदर आप किसी भी दूसरे राज्य से सड़क मार्ग द्वारा आ रहे हों, तो उत्तर प्रदेश की सीमा का अंदाजा अपने आप लग जाता था जहां अचानक से सड़कों पर गहरे गड्ढे दिखाई देने लगें, गाड़ियों की रफ्तार थम जाए, चलना थोड़ा कठिन हो जाए और यदि शाम (सायं काल) ढलते ही चारों तरफ अंधेरा छा जाए, तो मानकर चलिए कि आप उत्तर प्रदेश के बॉर्डर के भीतर प्रवेश कर चुके हैं। उस समय प्रदेश का सरकारी खजाना पूरी तरह खाली था और कोई भी बैंकर सरकार को पैसा या कर्ज देने के लिए तैयार नहीं था, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा कर्ज लेने की एक तय सीमा निर्धारित की गई थी और पुराने उत्तर प्रदेश की वित्तीय साख पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी।

“नमाज पढ़ने पर रोक नहीं, लेकिन सड़कों को तमाशा नहीं बनने देंगे”

​धार्मिक अनुशासन और सार्वजनिक व्यवस्था पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सीएम योगी ने कहा कि लोग अक्सर आज मुझसे पूछते हैं कि क्या यूपी में अब सचमुच सड़कों पर नमाज नहीं होती? मैं पूरी दृढ़ता के साथ कहता हूं कि उत्तर प्रदेश में अब सड़कों पर नमाज कतई नहीं होती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि सड़कें आम जनता के चलने और आवागमन के लिए बनाई गई हैं, न कि इसलिए कि कोई भी व्यक्ति या समूह चौराहे पर आकर उसे ब्लॉक कर दे और तमाशा बना दे। किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वह सड़क रोककर जनता के आवागमन को पूरी तरह बाधित करे।

​मुख्यमंत्री ने बताया कि जब इस नियम को लागू किया जा रहा था, तब कुछ लोगों ने दलील दी थी कि ‘हमारी संख्या ज्यादा है, ऐसे में कैसे संभव होगा?’ इस पर हमने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि जगह कम है तो आप लोग शिफ्ट में (बारी-बारी से) नमाज अदा कर लीजिए और अगर घर में रहने की जगह नहीं है, तो अपनी संख्या को नियंत्रित करना शुरू कर दीजिए।

उन्होंने दो टूक कहा कि अगर आपको सिस्टम के साथ सम्मान से रहना है, तो नियम-कानून को हर हाल में मानना ही शुरू करना पड़ेगा। नमाज पढ़ना जरूरी है, तो बिल्कुल पढ़ें और शिफ्ट में पढ़ें; सरकार इस पर कोई रोक नहीं लगाएगी, लेकिन सड़क पर नमाज पढ़ने की इजाजत अब कतई नहीं मिलेगी।

कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक छलांग: 2 एयरपोर्ट से बढ़कर हुए 16 एयरपोर्ट

उत्तर प्रदेश में सिविल एविएशन (नागरिक उड्डयन) के क्षेत्र में हुए क्रांतिकारी बदलावों को साझा करते हुए सीएम योगी ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि साल 2017 के पहले पूरे उत्तर प्रदेश के भीतर मात्र दो मुख्य एयरपोर्ट पूरी तरह संचालित थे एक राजधानी लखनऊ का और दूसरा वाराणसी का। इसके अलावा गोरखपुर और आगरा के एयरपोर्ट केवल आंशिक (कभी-कभार) रूप से ही संचालित हो पाते थे।

​लेकिन आज के बदलते उत्तर प्रदेश में कुल 16 एयरपोर्ट पूरी तरह सक्रिय और संचालित हो रहे हैं, जबकि पांच अन्य नए एयरपोर्ट्स पर तेजी से कार्य चल रहा है। प्रदेश में अब पांच शानदार इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं।

मुख्यमंत्री ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा यानी ‘नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ भी अब उत्तर प्रदेश ने बनाकर तैयार कर दिया है, जहां आगामी 15 जून से नियमित रूप से घरेलू विमानन (डोमेस्टिक सेवा) की शुरुआत होने जा रही है।