आगरा: ताजनगरी की स्वच्छता व्यवस्था और नगर निगम के बड़े-बड़े दावों की पोल एक विदेशी पर्यटक के कैमरे ने खोल दी है। विश्व प्रसिद्ध आगरा किले के पास खुले में शौच (Open Defecation) और सड़क किनारे फैली गंदगी की हकीकत जब एक विदेशी पर्यटक ने अपने सोशल मीडिया पर साझा की, तो पर्यटन जगत से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हड़कंप मच गया।
विदेशी पर्यटक हैरान: ‘यह है ताज का शहर?’
भारत भ्रमण पर आए एक विदेशी पर्यटक ने आगरा किले के बेहद करीब का एक वीडियो वायरल किया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मुख्य सड़क के किनारे एक व्यक्ति खुले में शौच कर रहा है। पर्यटक ने न केवल इस शर्मनाक दृश्य को फिल्माया, बल्कि किले के आसपास बहते खुले नाले और गंदगी के ढेरों को दिखाकर भी अपनी हैरानी जताई। पर्यटक ने वीडियो में संकेत दिया कि जिस ऐतिहासिक धरोहर को देखने दुनिया भर से लोग आते हैं, उसके पास ऐसी बदहाली की उसने कल्पना भी नहीं की थी।
स्मार्ट सिटी और नगर निगम के दावों की खुली पोल
आगरा को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। नगर निगम अक्सर सफाई व्यवस्था को लेकर खुद की पीठ थपथपाता है, लेकिन यह घटना बताती है कि हकीकत कागजों से कोसों दूर है।
ऐतिहासिक स्मारकों के पास खुले नालों का होना न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह पर्यटकों के अनुभव को भी कड़वा बनाता है। शहर में पिंक टॉयलेट्स और सुलभ शौचालयों के दावों के बावजूद मुख्य पर्यटन क्षेत्रों के पास खुले में शौच होना व्यवस्था की विफलता दर्शाता है।
इंटरनेशनल इमेज पर लगा गहरा दाग
आगरा भारत का चेहरा है। जब कोई विदेशी यहाँ से ऐसी तस्वीरें लेकर अपने देश लौटता है, तो इससे न केवल आगरा बल्कि पूरे भारत की ‘स्वच्छता छवि’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी नुकसान पहुँचता है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं पर्यटकों की संख्या और देश की रेटिंग पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
यह वीडियो वायरल होने के बाद अब सोशल मीडिया पर नगर निगम और जिला प्रशासन के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट रहा है। सवाल यह है कि वीआईपी रोड और स्मारक क्षेत्रों में लगातार सफाई की मॉनिटरिंग क्यों नहीं होती? करोड़ों की लागत से बनी स्मार्ट सिटी की मशीनरी आखिर कहाँ सो रही है? खुले नालों को टैप करने या ढकने का काम अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ?
आगरा किले के पास की यह ‘बदबूदार’ हकीकत इस बात की गवाह है कि जब तक धरातल पर कड़े कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक ताजनगरी केवल नाम के लिए ही ‘विश्व प्रसिद्ध’ रह जाएगी।

